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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

( ३८ ) बीजक कबीरदास ।
रै मात्रहै अर्थात् समुझेते धोखाँहीहै कुछ वस्तु नहीं है सो एक बिना रामनामके
जाने कहे साहबको जो बतावैहै रामनाम सो अर्थ बिनजाने मायाको बतायो जौ
है राम नाममें संसार औ ब्रह्माको अर्थ तौनेहै भव कहे भयरूप समुद्र तौनैंमें
संसार बूडि मुवा इहां लक्षणा है संसार बूडि मुवाकहे संसारी जीव बूडि
मुये ॥ १३ ॥
इतिदूजीरमैनीसमाप्तम् ।
अथ तीसरी रमैनी ।
चौपाई ।
प्रथम अरंभ कौनके भाऊ । दूसर प्रकट कीन सोठाऊ ॥१॥
प्रकटेब्रह्म विष्णु शिव शक्ती।प्रथमैभक्ति कीन जिव उक्ती॥२॥
प्रकटेपवन पानी औ छाया।बहुबिस्तारकै प्रकटी माया ३॥
प्रकटे अंड पिंड ब्रम्हंड।पृथिवी प्रकटकीन नवखंडा॥४॥
प्रकटे सिध साधक संन्यासी । ये सब लागिरहे अविनासी५
प्रकटे सुरनर मुनिसबझारी । तेऊ खोजि परे सबहारी॥६॥
साखी ॥ जीउ सीउ सब प्रकटे, वे ठाकुर सब दास ॥
कबिर और जानैनहीं, एक रामनामकी आस॥७॥
प्रथम अरंभ कौनके भाऊ । दूसर प्रकटकीनसोठाऊ ॥ १॥
प्रकटेब्रह्मविष्णुशिवशक्ती । प्रथमैभक्तिकीनजिवउक्ती ॥२॥
प्रथमअरंभ कौनके भाऊकहे भयो औ दूसर कौन प्रकटकियो जाते ये
सब व्यवहारहैं १ प्रथम अनुमान समष्टिजीवकियो मनके अनुभव ते ब्रह्म-
भयो औ बाणीभई ताते ब्रह्मा विष्णु महेशादिक देवता प्रकटभये उनकी सब