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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 766 में से

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पृष्ठ 87

( ३६ ) बीजक कबीरदास ।
पुरुषके अंगनते भईहै । औपुनि भगवान्की नाभीमें कमल भयोहै जौं मंगल
में कहिआये हैं, तेहिते ब्रह्माभये हैं तिनतें उत्पत्ति भई है । औ तौनै बात या
रमैनीहूं में कहै हैं कि पहिले इच्छा रूपी नारीते ब्रह्मादिक भये । औ पुनि
ब्रह्माण्डांतरानुवर्ती ब्रह्मादिकभये ते सतोगुणाभिमानी जे विष्णुते ऊपर देवलोक
बसावतभये ते ताके मालिक । और जो गुणाभिमानी जे ब्रह्माते मध्यकें
लोक बसाये ते तहांके मालिक । औ तमोगुणाभिमानी जे महादेव ते नीचेकें
लोक बसाये तहांके मालिकं होतभये । सो येतीनौ तीन लोकके मालिक होत
भये सोये तीनों तीन लोकके मालिकै हैं परंतु तौन तौन लोकनकी प्रधानता
देखाई है ॥ ४ ॥
तेपुनिरचिनिखंडब्रह्मांडा । छादर्शनछानवेपखंडा ॥ ५ ॥
पेटहिकाहुनवेदपढ़ाया । सुनतिकरायतुरुकनहिंआया॥६॥
तेतीनौँ देवता मिलिकै ब्रह्मांड में छा दर्शन छानबे पाखंड बनावत भये ॥
“ योगी जंगम सेवरा संन्यासी दुरवेश । छठयें कहिये ब्राह्मण छाघर छाउप-
देश ॥ दशसंन्यासी बारहयोगी चौदहशेष वखाना । बौध अठारहि जंगम
अठारहि चोबिस सेवरा जाना ॥” औ प्रथम उत्पत्तिमें कहि आये हैं ब्रह्मा वि-
ष्णु महेश तें यह ब्रह्मांडके ऊपर अपने लोक बसाये फिरि एक २ अंशते
अनंत कोटि ब्रह्मांडन में बसे जाय ५ औ पेटैते कोउ वेद नहीं पढ़ि आया
कहै गायत्री नहीं पढ़्यौ बरुवा नहीं भयो औ न पेटैते सुनति करायकै तुरुक
बनिआया है ताते॒हिन्दू तुरुकको जीव एकईहै सोतो ना जान्यो वेद किताब
की वाणी सुनिकै अपने २ कर्मते सब अनेक भेद ह्वैगये वेद किताबको भेद
न जान्यो ॥ ६ ॥
नारीमोचित गर्भप्रसूती । स्वांगधरै बहुतैकरतूती ॥ ७ ॥
तहियाहमतुमएकैलोहू । एकैप्राणबियापलमोहू ॥ ८ ॥
गर्भबासमें जबतुम रहेहो तब न हिन्दूए रह्योहै नातुरुकरह्यो न वेद पढ्योँ
नं तिहारी सुन्नति भई । जब गर्भते निकसे तब कर्म करिकै हिन्दू मुसलमान
ह्वैगये । बहै नारी जो है वाणी ताही में चित्त लगायकै कर्म करिकै नाना