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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

( ३२ ) बीजक कबीरदास ।
इच्छारूपनारिअवतरी । तासुनामगायत्रीधरी ॥ २ ॥
आपनेको जो धोखाते ब्रह्म मानिलियो समष्टिरूप जीव, ताके जब इच्छाभई
सोई मूल प्रकृति माया है तेहिते शबलित ब्रह्म भयो सो इच्छा माया जबप्रकट
भई ताको नामगायत्री धरावत भये । गायत्री तो सूर्य्यमध्यवर्ती जे श्रीरामचन्द्रहैं
तिनको तात्पर्य ते बतावैहै सो अर्थतो न ग्रहण करत भये सूर्य्यके मध्यमें साहब
है तामें प्रमाण॥"सूर्य्यमंडलमध्यस्थं रामंसीतासमन्वितम्"॥सूर्य्यप्रतिपादक अर्थ
ग्रहण करतभये । तेहिते दिन राति संध्या होतभई । औ ब्रह्मादिक देवताभये
सो आगे कहेंगे यह संसार मुख अर्थसमुझ्यो तेहिते गायत्री सबकी उत्पत्ति कर
तभई जो कहो काहेते जानो कि गायत्रीके द्वैअर्थ हैं तौ सुनो यहवाणी जोहै सो
सार शब्द जो रामनाम ताको लैके प्रथम प्रगटभई है । तामें द्वैअर्थहैं एकसाह
ब मुख, एक संसारमुख । ऐसे प्रणव . निगम आगम इनमें द्वै द्वै अर्थहैं, एक
साहबमुख एक संसारमुख।काहेते कि रामनाम ते सब निकसेहैं सो जो कारणमें
द्वैअर्थभये तौ कार्यमें द्वैअर्थहोवई चाहैं । सो संसारमुख अर्थलैकै जीव संसारी
होतभये सो यह उत्पत्ति मंगलमें बिस्तारते लिखिआये हैं ताते संक्षेप यहां उत्प
त्ति लिख्यो है ॥ २ ॥
तेहिनारीकेपुत्रतिनिभयऊ।ब्रह्माविष्णुमहेशनामधयऊ ॥३॥
तौने गायत्रीरूप नारीके पुत्र ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पन्न होत भये तब वह
नौं गायत्रीरूप नारी है॥ ३ ॥
तबब्रह्मापूंछतमहतारी । को तोर पुरुष केकर तुमनारी ॥ ४ ॥
तासोंब्रह्मा पूंछत भये कि को तोर पुरुष है काकरि तू नारी है औ काके
हम पुत्रहैं सो बताउ हम जानो चहैहैं तब वा नारी कहत भई ॥ ४ ॥
तुमहमहमतुमऔरनकोई । तुममोरपुरुषहमैंतोरजोई ॥५॥
प्रथम साहब के लोक प्रकाशमें अनादिकालते साहबते विमुखतारूप जो
जगत्को कारण तेहिते सहित जीव समष्टिरूप बास कियोरह्यो तिनके ऊपर
साहब दया कियो कि "अबोध सुषुप्ति ऐसे में परेहैं इनको सुखको अनुभव