कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( ३१ )
नम् ॥ इतिवाल्मीकीये ॥ औ साहब साकारद्विभुजनराकृतिहै । तामें प्रमाण ॥
स्थूलंचाष्टभुजं प्रोक्तं सूक्ष्मंचैवचतुर्भुजम् । परन्तुद्विभुजंरूपंतस्मादेतत्त्रयंजयेत् ॥ इतिआ-
न्दसंहितायां ॥ आनन्दोद्विभुजःप्रोक्तोमूर्त्तश्चामूर्त्तएवच । अमूर्त्तस्याश्रयोमूर्त्तःपर-
मात्मानराकृतिः ॥ इतिआनंदसंहितायां ॥ औ मुसलमाननके जे अच्छे समझ-
वारेहैंतेसाकारहीमानैहैं, काहेतेकिकुरानमें लिखै है—अल्लाह कहैहै कि "महम्मद
मोको एकबार जब लड़काईमेंदेखा है औ एक बार मैंने बुलाया मेरे सामने च-
लाआया दुइकमानते कम फरक रहिगया" सो महम्मद देखा यातौअल्लाहकेसूरति
है यह आयो औ महम्मदकीहदीस "खलकलईंनसान"अल्लाहके सूरतहीमें बना-
याहै ईनसान अपनी सूरतिका यहिसे यह आयाकि अल्लाह द्विभुजहै ।
यहिसे या मालूम भया कि अल्लाह कहिकै द्विभुज श्रीरामचन्द्रही वर्णन
करैहै । औ जे अल्लाहकी सुरतिकहतेहैं कि नहीं है, कुरानकी जबानी नहीं
मानते हैं तिनको काफरकहतेहैं औ वह जो है निर्गुण सगुणके परे साहब
नराकृति सो जाके ऊपर कृपा करै है, ताको आपनोहंसरूप अपनीइन्द्री
देइहै आपै देखिपरे है तामैं प्रमाण ॥ ब्रह्मणैवाजिघ्रतिब्रह्मणैव पश्यति ब्रह्मणै-
वशृणोतीतिश्रुतेः ॥ औ साहबको रूप साकार निराकारते बिलक्षणहै
यातेअरूपीरूप कहैहैं- औजेसोयहनामहै तैसोनामनहीं है वहनामविलक्षण- मन
वचनकेपरे है यातेवाको अनामानामकहै हैं तामेंप्रमाण । "अनामासोऽप्रसिद्धत्वाद-
रूपोभूतिवर्जनात् ॥ इतिअग्निपुराणे ॥ अमाकृतशरीरत्वादरूपीभगवान्विभुः ॥
इतिवायुपुराणे॥ औ साहबके हाथ पांय नहीं हैं निराकार आयो औ चलैहै ग्रह-
ण करिलेइहै याते साकारआयौतामेंप्रमाण॥ "अपाणिपादो जवनोग्रहीतापश्यत्यच-
क्षुःसशृणोत्यकर्णः"इतिश्रुतेः॥सो ऐसे साहबके लोक प्रकाश है ब्रह्मको यह जी-
वना समुझ्यो कि साहबको लोकःप्रकाश है मनते अनुभवकरि वह ब्रह्म आपही
को मानतभयो यही धोखा ब्रह्म है । सो जीवपै कहे एकरूपते औ कहेसमष्टिरूप
जीवलोक प्रकाशके अंतरमेंबास कियेरहै, सो अंतर ज्योति कहे सुरतिपाय प्रका-
शकीन कहे मतादिक उत्पन्न करि समष्टिते व्यष्टि होवेकी इच्छाकरत भये सो
आगे कहै हैं ॥ १ ॥