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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 756

( ७२६ ) बघेलवंशवर्णन ।
अष्टक नृप रघुराज कृत, युगलदास मुदकंद ॥
सार्थ गतागत चंद्र ऋषि, सिंहवलोकन छंद ॥८५॥
अथगतागत सवैया ।
तों यश शीश मही सरसाय यसारस हीम शशी सजतो ॥
तोमह तेज भसो विरमाहि हिमा रवि सो भजते हमतो ॥
तो जग नैरव सोहत चारु रुचा तहँ सों वरणै गजतो ॥
तों रघुराज भजै नहिं लोग गलोहिनजै भज राघुरतो ॥१॥
अर्थ-हेरघुराजसिंह तिहारो श्रीवृंदावन अरु श्रीजगन्नाथपुरीमें सुवर्णतुलादानादि
महादानरूप जो यह यशहै शीश मही कहे महीके शीशमें अथवा सब राजनके
यश ते शीश कहे शिरा मँही कहे पृथ्वीमें सरसाय कहे अधिकायकै सारस
हीम शशी सजतो. कहे सारस जो है कमल अरु हिम जोहै पाला अरु शशी
जो है चंद्रमा ताकों सजतो कहे अपनी शोभाते साजैहै कहै शोभित करै है यह
प्रतीपालंकारते सारस अरु हिम अरु शशीकी शोभा सब ऋतुमें सब कालमें
एकरस नहीं रहै है कमल झरिजाय है हिम गलिजाइहै शशी क्षीण हैजाइहै अरु
संकलंकहै अरु तिहारो यश सब कालमें एक रस रहै है अरु निःकलंकहै
याते उन सबनते अधिकहै यह व्यतरेकालंकार व्यंजित भयो, अरु तोमह
तेज भसो विरमाहि. कहे तिहारो जो महातेजहै सो वीर जे हैं बड़े २ राजा
तिनमें भसो कहे भासितहै ताते तिहारे तेजते तेऊ शंकित रहै हैं कि हमारी
राज्यं न लैले यह सूचितभयों अथवा विरमाहि कहे सब जगमें तिहारो तेज
विशेषकै रमैहै ताते तुम्हारे तेज करिकै सब राजा निस्तेज ह्वैगये यह ध्वनित
भयों यांहीते, हिमा रविसों भजतें हमतो. कहे आपने हियमें हम तो तुम्हारें
तेज को रवि सों कहै सूर्यसे भजै हैं कहे भजन करै हैं अर्थात् वर्णन करै हैं
यह उपमालंकारते सूर्य कमलनको आनंद देइहैं अरु तम नाश करै हैं अरु
सबको सुधर्ममें प्रवृत्त करै हैं ॥ अरु आपको तेज सज्जनके हृदयकमलको
आनंद देइहैं औ सब राजनके वीरताकें मदको, अज्ञानको नाश करै हैं अरु