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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 755

बघेलवंशवर्णन। (७२५)
महाराज रघुराज निकट पाखंडी कोटि कुटिलऊ सटपटै थिति उसलति है ॥
कवि नटखटनकी कूर बहुकटठनकी चुगुल चवाइनकी दाल ना गलतिहै ॥ ३ ॥
सुमति गणेश लसै साहिबीमें त्यों सुरेश धनमें धनेश शत्रु नाशनमहेशहैं ॥
तेजमें दिनेश मुदजनन प्रजेश प्रजापालनमें वेश सम राजत रमेशहैं ॥
गावत नरेश दीह निजहिं निवेश सभा सुयश विशेष जासु छाजै देश देशहै ॥
भन युगलेश रघुराजसे सुमतधारी सुत बांधवेश औ परेससेवा पेसहै ॥ ४ ॥
करयुग जोरि कमलापतिसों कमलाजी कहै युगलेश बार बार कहैं वैन कल ॥
रावरो भगत विश्वनाथ तनै रघुराज जन्यो तन्यो जासु यश चारु स्वच्छभल ॥
असित पदारथ ते सित हैगये हैं सबै परत पिछानि नाहिं जाय जहांजौने थल ॥
वसिये निरंतर की ताहि ऐके अंतरकी उदधिको अंतर न छोड़िजैये छोनी तल ५
भागवत पढ़यो भागवत को विश्वास मान्यो जननि सुभद्रा श्रीसुभद्रारूप जानिये॥
रामभक्त परमअनन्य महा भागवत विश्वनाथसिंह जासु जनक बखानिये ॥
भागवतदास नाम तिनहीं सों पायो भयो भागवत रूप कंठ भागवत गानिये ॥
भागवत सेवी रघुराजसिंह भागवत जाकें उर भौंन भगवंत भौन मानिये ॥ ६॥
सवैया-याचक वृंद मलिंदनको गण पाय सुपास अनंदित हीमें॥
आय मनोरथ पूरणकै यश गान करें चहुँ ओर महीमें॥
भाषतहैं कवि देशानि जाय नरेशनके दरवारनहीमें ॥
दान करीके कपोलनमें कीहरी रघुराजके हाथनहींमें७
दोहा-महाराज रानी सबै, गौरी सम महिमाथ ॥
लसैं पतिव्रत धर्मरत, तजैं न कबहूं साथ ॥ ८२ ॥
महाराज रघुराजके, अमित चरित्र अनूप ॥
युगलदास वरण्यो कछुक, निजमतिके अनुरूप ॥ ८३॥
जामें सुचित चरित सब, ऐसो अष्टक वेश ॥
विरचतहै युगलेश यह, सुखप्रद सुकवि विशेष ॥८४॥