कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबघेलवंशवर्णन । (७२१)
लालशिवबकशसिंह तेहि नामा । धीर वीर अतिहीं मतिधामा ॥
तासु अनुज भगवतसिंह तैसे । वचन जासु अंगद पग कैसे ॥
तेहिं शिवबकश सिंह सुत रूरो । लालरणदवनसिंह गुण पूरो ॥
कैयक अनुज तासुके जानो । तिनमें दिरगजसिंह सुजानो ॥
लालरणदवनसिंह पर मीती । कॅरि रघुराज मीत गुणि नीती ॥
सकल बघेलखंड जों राजी । कियें मुखतार परम है राजी ॥
दोहा-माधवगढ़ ढिग पार सरि, कछिया टोला गावँ ॥
नावँ जासु दिलराजसिंह, मालिकहै तेहिं ठावँ ॥ ६९॥
अमरसिंह कल्याणसिंह, तासु सुवन गुणग्राम ॥
महाराज परसन्न है, तिनहूंको दिय काम ॥ २७०॥
बांकेधौंवा सिंहको, कोष काम करिदीन ॥
देशी परदेशी बहुत, काम दियों सुखभीन ॥७१॥
तिन सबको मुखतारके, भूपति किय आधीन ॥
ते सब अबलों करतहैं, काम लोभते हीन ॥७२॥
छंद-यक काल अकाल कराल पर्यो ॥
विन अन्न दुखी बहु जीव मर्यो ॥
माहिमें कँगला सहसान जुरे ॥
सरि औसर राहन रोज फिरे ॥ १ ॥
बहु पर्गन बांधवदेश ठये ॥
विन अन्न दुखी सब जीव भये ॥
रघुराज गरीबनेवाज महा ॥
दिय अन्न तिन्हें मुदमें उमहा ॥ २ ॥
अंगरेजहु जौन निदेश कियो ॥
रुपया तेहिं पंचसहस्र दियो ॥
जोहिं औरेहु देशानके कँगला ॥
विन अन्न न शोक लहैं अचला ॥ ३ ॥
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