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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 741

बघेलवंशवर्णन । ( ७१३ )
दोहा-सबको करिदीन्ह्यो बिदा, ते ह्वै रेल सवार ॥
रानी सुत सब सैन्यगे, निजपुरको बिनवार ॥ २४ ॥
छरे संग सरदारलै, युग रानी सुत दोय ॥
तखतसिंह आवतभये, रींवाको मुदमोय ॥ २४ ॥
नृप रघुराज मोद उर छाई । शिविर करायो ले अगुवाई ॥
सुदिवसमें त्रय भयो विवाहा । छायो घर घर परमउछाहा ॥
जो पितृव्यकी सुता सयानी । तख्तसिंह व्याह्यो सुखमानी ॥
तख्तसिंह ल्याय सुत दोई । तिनमें जेठ कुँवर रह जोई ॥
ताको सुता अपनी व्याही । महाराज रघुराज उछाहि ॥
तेहिते लहरे कुँवरहिं काही । सुता विमातृ भगिनि कहँ व्याही ॥
दायज देन जु रह्यो करारा । पंचलक्ष दिय द्रव्य उदारा ॥
हय गज भूषण वसन अमोले । दियो तिन्हें रघुराज अतोले ॥
दोहा-मेवा सकल मँगायकै, अरु मिठाइ बहु भांति ॥
कैयो दिन सादर दियो, ऊंच नीच सब जाति ॥ २६ ॥
चारि रोज़को नेम जग, रखि मास लों बरात ॥
पूरी साज सबै जनन, पूरी सुख सरसात ॥ २७ ॥
रत्न जटिल सुवरण कटक, अरु बहु मोती माल ॥
निज सरदारनको दियो, छायो सुयश विशाल ॥ २८ ॥
कवित्त ।
एक समै बांधवेश महाराज रघुराज छरे सरदारन औ संगलै देवानहै ॥
रेलमें सवार कलकत्ताको पयान कीनो हरिहर क्षेत्र आदि तीरथ महान है ॥
परेमग तहाँकै नहान दै द्विजान दान तीजे रोज जब कलकत्ता नगीचान है ॥
हूनपति आज्ञा पाय हून मुख्य आगू आय लै गयो लेवाय डेरा देतभो मकान है॥ १॥
दोहा-डेरा आयो लाट पुनि, देखि भूपको रूप ॥
रूप न अस कोहु भूपको, भूपर गन्यो अनूप ॥ २९ ॥
मुद्रा सहस रसोई काहीँ । शिविर जाय पठयो सुखमाहीं ॥
दूजे दिन पुनि नृपति उदारा । सादर लाट शिविर पगुधारा ॥