कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Header] बघेलवंशवर्णन । ( ७०७ )
ज्वर विकारते यक समय, नृप किय विपुल उपास ॥
तज्यो न तबहूँ जप करब, पूजन रमानिवास॥९६॥
बालहिते कविता मन लायो । चित्रकूट अष्टकहि बनायो ॥
ग्रंथ रच्यो रघुनंद बिलासा । हनुमत शतक कियो बहुलासा ॥
लीन्ह्यो मंत्र केर उपदेशू । तब जे ग्रंथ रच्यौहै वेशू ॥
तिनको अब मैं देत सुनाई । विनयमाल दिय प्रथम बनाई ॥
रुक्मिणि परि पय विरच्यो ग्रंथा । जामें विदित काव्यकी पंथा ॥
व्यासदेव जो रच्यो पुराना । श्रीभागवत प्रसिद्ध जहाना ॥
भाषा विरच्यो भूप उदारा । अहै बयालिस जौन हज़ारा ॥
पुनि जगदीश शतक किय भाषा । जामें कवित बिचित्र सुराषा ॥
दोहा-रच्यो संस्कृत ग्रंथ विय, एक शतक जगदीश ॥
कियो सुधर्म विलास यक, श्रीरघुराज महीश ॥९७॥
तिलक बनायो तासु बुध, रंगाचारी वेश ॥
भजन कवित औरहु अमित, सादर रच्यो नरेश ९८॥
सोरठा-कानन जात शिकार, खेलत मारत शेरको ॥
और जे जीव अपार, तिनाहिं बचावत करि दया॥१॥
कवित्तधनाक्षरी ।
फेरत न आनन जौं ऐसे उच्च वारनपै ह्वैकारि सवार जाय नेर बेर बेरहै ॥
ढेर सरदार पै न सकत उठायकोऊ ऐसो लै रफल्ल घालि करै बाघ जेरहै ॥
कहें युगलेश गेर गेर कहूँ टेर टेर हांईं ठहराय जहां हाँकत करेरहै ॥
हेर हेर मारै लगे देर नहीं दौरिमेर भूप रघुराजसिंह शेरन पै शेरहै ॥ १ ॥
सोरठा-चलि पहाड़ महराज,बाग़ि बाग़ि जेहिं बारिमें ॥
हने जिते मृगराज, ते गोकुल बुध पहँ लिखे ॥ १ ॥
दोहा-महाराज रघुराजको, औरहु चारु चरित्र ॥
युगलदास वर्णन करत, जेहि यश छयो विचित्र ॥९९॥
शाह विलायतको दियो, सुक्का यक पठवाय ॥
लाट वजीर हमारसो, तकमा देहै आय ॥२००॥