कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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करि सलाम दोउ परस्पर, पूँछतभे कुशलात ॥
कहे कुशल सब भांति दोउ, बार बार हरषात ॥८४॥
वाम हाथ गहि दहिने हाथै । गयो लेवाय लाट सुख साथै ॥
तख्त़ ऊपर दै कंचन कुरसी । धरवायो जु हूँनपति हुलसी ॥
तामें अपने दहिने ओरै । नृप बैठाय बैठ सुख बोरै ॥
नीचे तख्त़ सैकरन कुरसी । धरवावतभो साहेब विलसीं ॥
तिनमें काशी चरकहरीके । रहे जे और भूप अवनीके ॥
औरहु ज़मींदार सरदारन । बोलि पठायो आये तेहिं छन ॥
तिनको तुरत तहां बोलवाई । दै ताजीम सबै सुखदाई ॥
क्रम क्रमते दीन्ह्यो बैठाई । बैठे ते सब शीश नवाई ॥
दोहा--मंत्री मुख सरदार जेहिं, दियो अजंट लिखाय ॥
नृपं सँग चलि तेहिं क्रमहिते, कुरसी बैठे जाय॥८५॥
निकट हूँनपतिके जबै, भई सभा यहि भांति ॥
अति प्रसन्न रघुराज पै, भयो ला