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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 732

( ७०४ ) बघेलवंशवर्णन ।
सुखयुत बीतिगये कछु काला । लाट हूनपति जौन विशाला ॥
लै बहु सैन्य कानपुर आयो । सब राजनकों खत लिखवायो ॥
आवहिं इतै भेटके हेतू । सुनि सुनि सब नृप गये सचेतू ॥
दोहा-महाराज रघुराजको, लिखत भयो खत सोइ ॥
मुलाकात मम करनको, आवै इत मुद मोइ ॥ ८१ ।
तहाँ चलन नृप कियो तयारी । बरजे तबहुँ इतै नर नारी ॥
दीनबंधु तबहूं मतिवाना । कह्यो पैज करि वचन प्रमाना ॥
चलिये भूप संदेह न कीजै । बिना चलेहीं भय गुणि लीजै ॥
सत्य विचारि बचन तिनकेरे । काहूके दिशि तनक न हेरे ॥
लै कछु सैन्य चैन भरि भूरी । चल्यो कानपुर यद्यपि दूरी ॥
मगमें बहु जन किये निवारण । लाटबोलाये है कछु कारण ॥
गुणि हरि उर भरोस नृप भारी । काहू ओर न नेकु निहारी ॥
दीनबंधुके मग ज्वर भयऊ । सो न मानि कछु नृप सँग गयऊ ॥
दोहा-जाय सैन्य युत कानपुर, डेरा सुरसरि तीर ॥
करत भयो सुनि हूनपति, भयो मुदित मतिधीर ॥८२।
दगी मुकामी फेरि सलामी । बँधी पंचदश जौन मुदामी ॥
पैदर अरु असवारन काहीं । दिय नृप अरुण पोशाक तहांहीं ॥
फूलसिंरी अरुणै गज भासी । सूही साज वाजिगण गासी ॥
सरिस वसंत सैन्य सुठि सोही । लखि लखि भूपहु गे मन मोही ॥
लाट लखनऊ ह्वै जब आयो । मुलाकात हित नृपहि बोलायो ॥
मुख्य अमात्य जौन अभिरामा । दीनबंधु है जाको नामा ॥
श्रीरघुराज ताहि लै संगै । गये सैन्य युत भेट उमंगै ॥
यक साहेब लैके अगवाई । साहर भूपहि गयो लेवाई ॥
दोहा--शिविर हूनपतिके निकट, पहुँचे जब रघुराज ॥
पाय लाट साहेब खबरि, आगू लै महाराज ॥ ८३ ॥