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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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(७०२) बघेलवंशवर्णन ।
अगरेजकें सब देश लूटे हनेगो रण धायकै ॥
ढिग वेगि बहु वागीन काहँ नरेश आशु मँगायकै ॥
यकमें चढ़ायो द्वारकेसहि वंश प्रीति बढ़ायकै ॥
पुनि नाथ सहित समाज है असवार बहुबागीनमें ॥
चलिदियो परम निशंक परम प्रवीन परम प्रवीनमें ॥
मिरजापुरै ढिग भूप आयो आय बागी वै तबै ॥
बहु विनय कीनी आप करहिं सहाय तौ सुधरै सबै ॥
तब नाथ ऐसो कह्यो तिनसों हाथ यह यदुनाथहै ॥
सब भांति मोहिं भरोस जाको जो अनाथन नाथहै ॥
सुनि गये ते सब महाराजहुँ आय रींवापुर बसे ॥
यक रच्यो नगर गोविंदगढ़ तहँ जायकै कबहूं लसे ॥
अँगरेजके बागी तिलंगा बागी सिगरे देशको ॥
वश कियो कोहु नरेश को रहे डरत कोहुँ नरेशको ॥
मैहर विजय राघवहुके गे विगरि तिनके दावते ॥
मग रोंकि गोरनको हने बहु जोर जुलुम जमावते ॥
तब आय बहु अँगरेज रींवा नगर कियो निवासहै ॥
महाराज श्रीरघुराज तिनको कियो परम सुपासहै ॥
डर मानि रींवा नगर को नहिं आय बागी कोउ सके॥
मतिवंत अति श्रीवंत गुणि सब संत नृपको सुखछके
अंगरेज लखि वर तेज भाष्यो वांधवेश नरेशसों ॥
लै खर्च हमसों राखि लीजै और सैना वेशसों ॥
मैहर विजय राघवहुके बागी उपद्रव करत हैं ॥
चलि मारि तिन्हैं निकारि दीजै दुरग लीजै हम कहैं ॥
सुनि भूप तैसहि कियो सैनप दीनबंधु दिवानकै ॥
लिय घेरि मैहर प्रथम तोपलगाय आशु पयानकै ॥
भगि गये तहँके यूह योगी वेगि करि तहँ थानहैं ॥