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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 766 में से

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पृष्ठ 73

ररांकहै सुनौरेभाई । सतगुरुपूँछिकैसेवहूआई॥२॥” इत्यादिक बहुत वाक्यहैं
यहफलहै।औ अर्थबाद कबीरजी तो साहबके पासके हैं उनको संसारका कौन
डर है यह प्रशंसा करै है याते अर्थबादभयो ॥ “डरपतअहों यहझूलिबेको
राखुयादंव राय । कहकबीर सुनु गोपाल बिनती शरण हरितवपाय” ॥ औ
प्रकरणमें प्रतिपाद्य जोहै कि रामनामैकोजानैहै सोई छूटिजायहै औजे नहीं जानै
हैं औरऔरमतनमें लगेहै तेईसंसारी होयहैं यहबात दृष्टांतदै कै रामनामही को दृढ़
कियो है । “राम नाम बिन मिथ्याजन्म गँवाईहो । सेमरसेइसुवाजोहँड़यों
ऊनपरेपछिताईहो ॥ ज्यों मदिपगांठि अरथदै घरहुकी अकिलगँवाईहो ।
स्वादहुउदरभरैजो कैसे वोसहिप्यास न जाईहो” ॥ इत्यादिककहरामें लिख्यो हैं
यह उत्पत्तिभई। येई षट्‌लिंगहैं जे इनको देखिकै अर्थकरै हैं सो सत्यहै, जे इनको
नहीं जानिकै अर्थकरैहैं वहग्रन्थको तात्पर्य औरहै और अर्थ करैहै सो अनर्थहै ।
जैसे बीजकको कोई निराकार ब्रह्ममें लगावैहै कोई जीवात्मामें लगावै कोई नये
नयेखामिन्द बनाइकै अर्थलगावैहै इत्यादि । वेमनमुखी अपने अपने मनते नाना
मत्तनमें अर्थलगावैहैं ते अनर्थ हैं अर्थनहीं हैं । वेगुरुजे हैं सबते गुरु परमपुरुष
श्रीरामचन्द्र तिनके द्रोहीहैं ताते प्रमाण ॥ “गुरुद्रोही औमनमुखी नारिपुरुष
अबिचार । तेनरचौरासीभ्रमाहिं जबलगिशशिदिनकार” ॥ १ ॥
अरु हम जो बीजकको यह अर्थ करैहैं तामें छउलिङ्ग श्रीरामचन्द्रमें घटितहैं
तेहितेजो अर्थ हम करैहैं अनिर्वचनीय श्रीरामचन्द्रको प्रतिपादन सोई ठीकहै काहें
तें कि जहांभारिप्रभुहैं तिनहूंके प्रभुहैं तौनेमें प्रमाण बाल्मीकीयको ॥ “सूर्य्य-
स्यापिभवेत्सूर्योह्यग्नेरग्निःप्रभोःप्रभुः” । अर्थ जोयेईसूर्यमें येईअग्निमेंअर्थलगावै तौ
पुनरुक्तिहोयहै काहेते जबबड़ोप्रकाशमान सूर्यको कह्यो तब अग्नि को कहिवे कोहै
तातेयहअर्थहै जो कर्मनमें लोकनँकी प्रेरणाकरै सोकहावै सूर्य अर्थात् अन्तर्यामी
औसबकेआगेरहतभयो यातेअग्निकहावै ब्रह्मसोसूर्यके सूर्यकहै अंतर्यामीके अंतर्यामी
औ अग्निकहे ब्रह्मकेब्रह्मअंतर्यामी परिछिन्नहै तातेबड़ो ब्रह्महै जो सर्वत्र पूर्णहै औप-
रिछिन्नहै ताते बड़ोजाको प्रकाश यह ब्रह्महै जामें सबजीव भरे रहेहैं ऐसासाहब-
कोलोकहै सबकोप्रभुपरब्रह्मस्वरूप ताहूकेप्रभुवह लोकके मालिक श्रीरामचन्द्रहैं ।
वहब्रह्मजोहै सोई मनबचनके परेहै पुनिजाको वो प्रकाशहै ब्रह्मसोलोककैसेमन