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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 720

( ६९२ ) बघेलावंशवर्णन ।
कवित्त ।
करिकै पेसवाई महाराना श्री स्वरूपसिंह उदैपुर आनि मुदै उरकै दराजको ॥
सकल सुपास जहां दीन्ह्यो जनवास तहां कीन्ह्यो सन्मान दे हुलास त्यों समाजको ॥
लखि लखि नारी नयन नृपति किशोर सारी मैन वस भई छोडी ऐन काज लाजको ॥
कहैं ठाम ठाम कैधौं काम सुखधामधाम काम त्यागि जो हैं जन ग्राम रघुराजको १ ॥
लगन विचारि कह्यो जादिन गणक गण तादिन पधारयो रघुराज द्वारमाह है ॥
देखिकै वरात शोभा पुरजनवातलोभा रांनहुको भा अथाह भारी उतसाह है ॥
व्याह भयो छोनीमें उछाह छायो महा तहाँ याचक उमाह भरो यांचिभो अचाहहै ॥
राह राह कहत न ऐसो नर नाह कहूं सुन्यो सांच शाहनको करन पनाहहै ॥
दोहा-रहस वहस युत होत भो, पुनि उदार जेवनार ॥
सरदारन युत फेरि भो, दरबारहुँ दरबार ॥ १४० ॥
कवित्त ।
जेते ऐंडदार राजा राजत पछाह माँह शाहन सों अकस जे कीन्हीहै बनायकै ॥
कलम बिनाही लिखें हिम्मति न रही काहू महाराना सुता जो विवाहै सुखछायकै॥
महाराज विश्वनाथ सुत रघुराज सिंह अचरज कीनी करतूति तेज छायकै ॥
सुनिं सुनि ते वैन नरराय पछितायमहा हाथ मींजिरहे शरमाय शीशनाइकै ॥
दोहा-शिव यकलिंग प्रसिद्ध तहँ, तिनके दर्शन हेत ॥
जातभयो रघुराज पुनि, मंत्री सैन्य समेत ॥ ४१ ॥
हय गय अरु मुद्रा सहस, सादर तिनहिं चढ़ाय ॥
दर्शन लीन्ह्यो सरस उर, सरस हरस सरसाय ॥ ४२ ॥
महाराज विश्वनाथ सुत, श्रीरघुराज उदार ॥
फेरि नाथजी दरशहित, गये साथ सरदार ॥ ४३ ॥
साजि वाजि गज वसन वर, मोहर शत सुख साथ ॥
माथनाय अर्पण कियो, पद पाथज श्रीनाथ ॥ ४४ ॥