कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६८२ ) बघेलवंशवर्णन ।
जाके गौहरशाह बसि, जायो अकबर शाह ॥
सैन्य साजि जेहिं तखतमें,बैठावत नरनाह ॥८६॥
जाजमऊलों जायकै, दिल्ली दियो पठाय ॥
अँगरेजहुँ अठवर्नको, दीन्ह्यो जंगभगाय ॥८७॥
तासु तनय जयसिंहभो, जयमें सिंह समान ॥
जाहिर दान कृपानमें, भक्तिवान भगवान ॥८८॥
दशहजार असवार लै, पूनाको हारोल ॥
आवतभो यशवंत तेहिं, हत्यो प्रताप अतोल ॥८९॥
गहरवार करि गर्व बहु, लीन्हे देश दबाय ॥
तिनको मारि भगाय दिय, बचे ते गिरिन लुकाय९०
देश आपने अमल करि, दै विप्रन बहु दान ॥
अंत समय तनु प्राग तजि,हरिपुर कियो पयान॥९१॥
विश्वनाथ नरनाथभो, तासु तनय यशगाथ ॥
रति अनन्य सियनाथपै, भई जासु महिमाथ ॥९२॥
सरि सर घर घर पुर पथन, छयो राम गुणगाथ ॥
कितो परीक्षित कै कियो, कलि कृतयुग विश्वनाथ९३
तासुतनय रघुराज भो, महाराज शिरताज ॥
राजत राज समाजमधि,जाको सुयश दराज ॥९४॥
श्रीकबीरजी कथित यह, है विचित्र नृप वंश ॥
नहिं असत्य मानै कोऊ, जानि संत अवतंश ॥९५॥
सतयुगमें सत नाम रह, अरु मुनींद्र त्रेताहिं ॥
करुणामय द्वापर रह्यो, अब कबीर कलि माहिं ॥९६॥
कबित्त ।
नृपति उदार केते भये अनुसार मति तिनके अपार गुण यश कियो गानहै ॥
जनम करम भूप रघुराजको अनूप धरमको जूप दिव्य जाहिर जहानहै ॥
देख्यो निज नैन ताते भरो अति चैन उर करतहौं निज वैन सबिधि बखानहै ॥
कहै युगलेश अहै झूठको नलेश कहूं मानि है विशेष सांच सोई बड़ो जान है ॥१॥