कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २० ) बीजक कबीरदास ।
अथ षट् लिंग वर्णन ।
"उपक्रमोपसंहारावभ्यासोपूर्वता फलम्॥ अर्थवादोपपत्तिश्चलिंगंतात्पर्यनिर्णये"
उपक्रमउपसंहार अभ्यास अपूर्वता फल अर्थबाद उपपत्ति इहांबस्तु तात्पर्यके
बर्णनमें लिंगकहे बोधकहै ॥ उपक्रम उपसंहार को लक्षण यह है "प्रकरणके
विषे प्रतिपाद्य जोबस्तु ताको आदिअंतके बिषयजोहै बर्णनसो उपक्रम औ उपसंहार
कहावै" १ औ प्रकरणके बिषे प्रतिपाद्य जो है बस्तु ताको फेरि फेरिजोहै
वर्णन सोअभ्यास कहावैहै २ औ प्रकरणकेबिषे प्रतिपाद्य जो है बस्तुसो औरै
प्रमाणकरिकैवर्णनमें न आवै सोकहावै अपूर्वता ३ प्रकरणके बिषे प्रतिपाद्य जो
है बस्तु ताकेंज्ञानैकरिकै ताकी जोहै प्राप्ति सो कहावै फल ४ औ प्रकरणमें प्रति
पाद्यजोहै बस्तु ताकीजोहै प्रशंसा सो कहावै अर्थवाद ५ औ प्रकरणमें प्रतिपाद्य
जो है बस्तु ताकोदृष्टांतकरिकै फेरिजोहै प्रतिपादन सोकहावै उपपत्ति ॥ ६ ॥
इहांकबीरजीके बीजककेप्रकरणकेआदिमें औ आदिमंगल में कहाहै कि
शुद्ध जीव साहबके लोकके प्रकाशमें पूर्णरहै है जब साहब सुरति देइहै तब
जीव उत्पन्नहोयहै यह जीव शुद्ध है साहब को है मन मायादिक यामें नहीं
है ये बीचहीते भयेहैं । मनमायादिको कारण यामें बनोरह्योहै तांतेसाहबमें
नालगेसंसारमुख ह्वैगये । जब श्रीरामचन्द्रकीप्राप्ति होई तबहीं शुद्धजीवहोइ ।
सो साहब हक्यो सो नामान्यो मन माया ब्रह्म में लगिकै संसारी है गयो। (जीवरूप
यक अंतरवासा । अंतर ज्योति कीनपरकासा १ इच्छारूप नारि अवतरी । तासु-
नाम गायत्रीधरी ) २ यहउपक्रम वाक्यहै । औ पदन के अंतमें बिरहुलीहै ॥
(बिषहरमंत्र न मानबिरहुली । गाडुरी बोलै और बिरहुली ॥ बिषकी
क्यारीबोयो बिरहुली । जन्म जन्म अवतरे बिरहुली ॥ फल यक कनरइल
डाल बिरहुली । कहैं कबीर सचुपायबिरहुली । जो फलचाखहु मोर
बिरहुली १) सोबिरहुली में यहलिख्यो है कि तुम तौ प्रथम शुद्ध रह्यो
१ सर्वज्ञ पुरुषोंके लिखे जितने ग्रन्थ हैं सबमें षट्लिङ्ग अवश्य होतेहैं और यह
ग्रन्थ सर्वज्ञ सत्यगुरु कबीर साहब विरचितहै इस कारण षट्लिंग का स्वरूप प्रदर्शित
करते हैं ॥