सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 707, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 707

बघेलवंशवर्णन । ( ६७९ )
सो तेहितें इंग्यरहै वंशा। होइहै नृपनमाहँ अवतंशा॥
बिच बिच और भूप जे है हैं। ते हरिभक्ति हीन है जै हैं॥
दोहा-ब्रह्मतेजते तपित अति, हैहै कोउ नरेश ॥
तजि यह बांधव दुर्ग को, वसिहै औरे देश ॥ ६४॥
ते सब भूपन को जस नामा। शिष्य मोर लिखिहैं अभिरामा॥
दशै वंश तुव अंतहिकाला। संत वेषदै दरश विशाला॥
तोको रामधाम लैजैहैं। आवागमन रहित करिदैहैं॥
अस कहि श्रीकबीर भगवाना। परमधामको कियोः पयाना॥
श्रीकबीरके शिष्य सुजाना। धर्मदास भे विदित जहाना॥
तिनके शिष्य प्रशिष्य घनेरे। लिखे जे औरहुँ भूप बड़ेरे॥
तिनको नाम सुयश परतापा। कहिहौं मैं सुखमानि अमापा॥
कह्यो पूर्व जो संत कबीरा। वीरभानु नृप भो मतिधीरा॥
दोहा-राम भूप सुत तासु भो, इन दूनौं करतूति ॥
प्रथम कछुक वर्णन करौं, जग प्रसिद्धमजबूति ॥ ६५ ॥
दिल्ली रह्यो हुमायूं शाहा। मान्यो हुकुम सकल नरनाहा॥
शेरशाह दिल्लीमें आई। दियो हुमायूं शाह भगाई॥
दिल्लीमें करि अमल सुहायो। सदल आपनो अदल चलायो॥
शाह हुमायूं बेगमकाहीं। गर्भवती सुनिकै श्रुतिमाहीं॥
नरहरि महापात्र लिय मांगी। सब भूपन ढिगगे सुख पागी॥
राख्यो नहिं कोउ भूपति ताहीं। आयो वीरभानु ढिग माहीं॥
वीरभानु तेहिं भगिनी भाखी। पाटन शरह देतभयो राखी॥
बेगम सो दिल्लीपति जायो। अकबर शाह नामसो पायो॥
दोहा-आई बाधा नगरमें, शेरशाह की सैन ॥
वीरभानु नृपसों कहे, लखि आये जे नैन ॥ ६६ ॥
तहँते नृपति पयान करि, बांधवगढ़गो धाय ॥
शेरशाह लिय छेंकि तेहिं, अमित सैन्य लै आय॥६७॥