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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 704

( ६७६ ) बघेलवंशवर्णन ।
कहें नाथ भल कीन सलाहा । हमरें उर महान उत्साहा ॥
पुनि विरसिंहदेव मुद भरिकै । वीरभानु युत मज्जन करिकै ॥
दोहा-वेणीमें बहु दान दै, युत सन्मान द्विजान ॥
लै सँग सैन्य पयान किय,विपुल बजाय निसान ५२॥
कवित्त ।
सोहत सवाव लाख संगमें सवार लोने युग लाख पैदरहु गौने जासु साथमें ॥
बेशुमारगज त्योंहीं सुतर अपार राजे योंहीं कूँच करि भरे आनँदके गाथमें ॥
बिच बिच पंथ वास करि बांधवदुर्ग,पास आय नीचे डेरा कियो धारे अस्त्रहाथमें।
विरसिंहदेव जाय लषणकी पूजा तहां करि सविधान धार्यो पद जल माथमें ॥१॥
स०-सादर साधुन विप्रनको नृप छिप्र भली विधि बोलि जेवायो
फेरि सबै ज़मींदारन औ भुमियानको आपने पास बोलायो ॥
ते सब आय सलाम किये दिये भेट कह्यो नृप वैन सोहायो ॥
डेरा करो सब जाय सुखी दियो दण्ड तेहीं जो बोलाये न आयो
दोहा-सांझ समय दरबारको, सादर सबहिं बोलाय ॥
कह रै यत तुम शाहकै, सुनहु सबै चित लाय ॥५३॥
कवित्त ।
शाह यह राज्य हमें दियो है उछाह भरि प्रथम सम्प्रीति वैन सबसों बखानै हैं॥
रीति या बघेलवंशकी है क्रोध ठानै नाहिं येतेहुँ पै कोई जो न हुकुमको मानै हैं ॥
युद्ध करिवेको जो तयार होत ताको हम बाघही है क्रुद्ध ह्वैकै आसनको ठानै हैं ॥
ऐसे अवनीशवैन सुनि सुनि शीशनाय कहे हम रावरेके रैयत प्रमानै हैं ॥ १ ॥
सोरठा-ईश्वर आप हमार, हम सेवक हैं रावरे ॥
सुनि गढ़भूप उदार,आयो विरसिंहदेव ढिग॥५४॥
कवित्त ।
तेग धरि आगे विनय कियों अहैं बाल हम आपहूँ हमारे पिता पालैं प्रीति ठानिकै॥
सुनि विरसिंहदेव बाहँ गहि पुत्र कहि लीन्ह्यो बैठाय उर महामोद मानिकै ॥
कह्यो पुनि तूतो वीरभानुके समान मेरे कह्यो पुनि सोऊ पाणि जोरि सुख सानिकै॥
महाराज किला चलि बैठैं राज्य आसनमें करों सोई दीजिये निदेश दास जानिकै १