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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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बीजककी-अनुक्रमणिका ।


[स्तम्भ १]

विषय. पृष्ठ.
आदिमंगल।
प्रथमे समरथ आप रहे १
रमैनी
नीवरूप एक अंतर बासा २७
अंतरज्योति शब्द एक नारी ३४
प्रथम आरम्भ कौन को भयऊ ३८
प्रथम चरन गुरु कीन्ह बिचारा ४०
कहंलो कहौं युगन की बाता ४२
वर्णहु कौन रूप औ रेखा ४६
जहिया होत पवन नहि पानी ४८
तत्वमसी इनके उपदेशा ४९
बांधे अष्ट कष्ट नौ सूता ५२
रांही ले पिपराही बही ५४
आंधरी गृष्ट सृष्टि भई बौरी ५६
माटिक कोट पषानक ताला ६०
नहिं प्रतीति जो यहि संसारा ६२
बड़ा सो पापी आहि गुमानी ६७
उनई बदरिया परिगो संझा ७०
चलत चलत अति चरन पिराने ७२
जस जिव आपु मिलै अस कोई ७४
अद्भुत पंथ बरणि नहिं जाई ७७
अनहद अनुभव की करि आशा ७८
अब कहु रामनाम अविनाशी ८०
बहुत दुखै है दुःख की खानी ८२


[स्तम्भ २]

विषय. पृष्ठ.
अलख निरंजन लखै न कोई ८३
अल्प सुखहि दुख आदिक अंता ८५
चन्द्र चकोर अस बात जनाई ८७
चौतिश अक्षर को यही विशेषा ८९
आपुहि कर्ता भे करतारा ९०
ब्रह्मा को दीन्हो ब्रह्मंडा ९३
अस जोलहा का मर्म न जाना ९५
बज्रहु ते तृण छनमें होई ९६
औ भूले षट दर्शन भाई ९८
स्मृति आहि गुणनको चीन्हा १००
अन्धको दर्पण वेद पुराना १०१
वेदकी पुत्री स्मृति भाई .... १०२
पढ़ि पढ़ि पंडित करहु चतुराई १०५
पण्डित भूले पढ़ि गुनि वेदा १०७
ज्ञानी चतुर बिचक्षण लोई १०९
एक सयान सयान न होई ११०
यह विधि कहौं कहा नहिं माना ११२
जिन्ह कलमा कलिमांहि पढ़ाया ११३
आदम आदि सुद्धि नहिंपाई ११५
अंबुकी राशि समुद्र की खाई ११६
जब हम रहल रहा नहि कोई ११८
जिन्ह जिव कीन्ह आपुविश्वासा ११९