कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४ ) बीजककी-अनुक्रमणिका ।
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कबहूँ न भये संग औसाथा १२१ | नारी एक संसारै आई १६५
हरिणाकुश रावण गौ कंसा १२३ | चलीजात देखी एकनारी १६६
बिनसे नाग गरुड गलिजाई १२५ | तहिया गुप्त थूलनहि काया १६८
जरासंध शिशुपाल संहारा १२६ | तेहि साहब के लागहु साथा १७०
मानिक पुरहि कबीर बसेरी १२७ | माया मोह कठिन संसारा १७३
दरकी बात कहो दरवेशा १२८ | एके काल सकल संसारा १७४
कहते मोहि भयल युगचारी १२९ | मानुष जन्म चूके जगमांझी १७६
भाकर नाम अकहुआ भाई १३० | बढ़वत बाढ़ि घटावत छोटी १७८
जेहिकारण शिव अजहुं वियोगी १३३ | बहुतक साहस करिजिय अपना १७९
महादेव मुनि अंत न पाया १३४ | देव चरित्र सुनौ रे भाई १८०
मरि गये ब्रह्मा काशीके वासी १३५ | सुखक वृक्ष एक जगत उपाया १८१
गये राम औ गये लक्षमना १३७ | छत्री करे क्षत्रिया धर्मा १८३
दिन दिन जरे जरल के पाऊ १३९ | जो जिय आपन दुखहि संभार १८४
कुतिया सूत्र लोक एक अहई १४० | इति रमैनी ।
तै सुत मानु हमारी सेवा १४२ |
बढ़त चढ़ावत भड़हर फोरी १४३ | अथ शब्द ।
छाडहु पति छाडहु लवराई १४५ | सन्तो भक्ति सतोगुरु आनी १८७
धर्म कथा जो कहते रहई १४६ | सन्तो जागत निन्द न कीजै १९०
जो तोहि कर्त्ता वर्ण विचारा १४८ | सन्तो घरमें झगरा भारी १९४
नाना वर्णरूप एक किन्हा १५० | सन्तो देखत जग बौराना १९६
काया कंचन यतन कराया १५१ | संतो अजरज एक भौ भाई २००
अपने गुणको औगुण कहहु १५२ | सन्तो अचरज एक भौ भारी २०२
सोई हीतु बन्धु मोहि भावै १५५ | सन्तो कहौं तो को पतियाई २०४
देहहलाये भक्ति न होइ १५६ | सन्तो आवे जाय सो माया २०५
तेहि वियोग ते भये अनाथा १५७ | सन्तो बोले ते जग मारे २१३
ऐसा योग न देखा भाई १५९ | सन्तो राह दुनों हम दीठा २१५
बोलना कासो बोलिये भाई १६१ | सन्तों पांड़े निपुण कसाई २१७
भोग बधावा समकरि माना १६३ | सन्तो मते मातु जन रंगी २१९