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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 694

( ६६० ) बघैलवंशवर्णन ।
रामभक्त शिरताज जे, महाराज विश्वनाथ ॥
करन अनाथ सनाथ पद, पुनि पुनि नाऊं माथ ॥ ६ ॥
सवैया-भूपशिरोमणिश्रीविश्वनाथतनैरघुराजअनाथनिनाथै।
श्रीयदुनाथकोभक्त अनूपमसेवी सदाद्विजसाधुनगाथै ॥
तेज तपै दिननाथसों जासु यशो निशि नाथ दिपै महिमाथै
तापद् पाथजमें सुख साथ है जोरिकैहाथनवावतमाथै ॥ १ ॥
दोहा-पवनपूत जय दुखदवन, राम दूत सुखधाम ॥
शमन धूत सुकृपाभवन, बल अकूथ सब ठाम ॥ ७ ॥
जय कबीर मतिधीर अति, रति जेहिं पद रघुवीर ॥
क्षीर नीर सत असत कर,विवरण हंस शरीर ॥ ८ ॥
जय हरि गुरु हरि दास पद, पंकज मोहिं भरोस ॥
जाकी कृपा कटाक्षते,मिटत सकल अफसोस॥ ९ ॥
संतत संतन भूसुरण, चरण कमल शिरनाय ॥
बार बार विनती करौं, सब मिलि करो सहाय ॥ १० ॥
रच्यो रामरसिकावली, ग्रंथ भूप रघुराज ॥
तामें बहु भक्तन कथा, वरण्यो भरि सुखसाज ॥ ११ ॥
भक्तमाल नाभा सुकृत, ताहीके अनुसार ॥
श्रीकबीरहू की कथा, तामें रची उदार ॥ १२ ॥
छप्पय-जो कबीर बांधव नरेश वंजावलि भाखी ॥
अरु आगमनिर्देश भविष्यहु जो रचि राखी ॥
सोउ समास सहुलास तासु मैं वर्णन कीनो ॥
सुनत गुणत जेहिं सुकवि संत संतत सुख भीनो ॥
तेहि तुम वरणौ विस्तार युत, शासन नृप रघुराज दियो ॥
कह युगलदास धरि शीश सो, वर्णन हौं आरंभकियो॥१॥
घनाक्षरी ।
प्रथम कबीरजी सिधारि पुरी मथुरामें संतन सहित अति हरष बढ़ायकै ॥
तहां धर्मदास आय प्रभु पदपंकजमें बैठो बार बार शीश सादर नवायकै ॥