सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 692, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 692

(६५८) बीजक कबीरदास ।
बहु परचै परतीति दृढ़ावै सांचेको बिसरावै ।
कळपत कोटि जन्म युग वांगै दर्शन कतहुं न पावै ॥
परम दयालु परम पुरुषोत्तम ताहि चीन्ह नर कोई ।
तत्पर हाल निहाल करतहै रीझतहै निज सोई ॥
बधिक कर्म करि भक्ति दृढ़ावै नाना मतको ज्ञानी ।
बीजक मत कोइ बिरला जानै भूलि फिरै अभिमानी ॥
कह कबीर कर्त्तामें सबहै कर्त्ता सकल समाना ।
भेद बिना सब भरम परे कोउ बूझै संत सुजाना ॥ ३६१ ॥
इति श्रीकबीरजी विरचित बीजक तथा सिद्धि श्रीमन्महाराजाधिराजश्रीमहाराजा
श्रीराजाबहादुरश्रीसीतारामचन्द्रकृपापात्राधिकारिविश्वनाथसिंहजूदेवकृत-
पाखण्डखण्डनी टीकासमाप्ता । शुभमस्तु ।