सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 691, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 691

साखी । ( ६५५ )
यहीं मनते डरउपजा कहे यहीके अनुभवते ब्रह्मभयो सो भूत ब्रह्मको सबै डेंरा-
यहैं सो यही ब्रह्मके डरमें जीव परा है कहे हराहै सो यह ब्रह्मके डरते चैन न
याको परा अर्थात् यह ब्रह्मको ढूंढ़तही रहिगयें न पायो न ब्रह्म भयो न
चैन भयो यह कहै हैं कि राम को कोई देखा है हमतो नहीं देखा जो कोई
हमको देखाइ देइ तौ हम मानैं सो अरे मूढ़ौ तुमतो डरमें परेहौ तुमको कैसें
देखाइदेइँ जाको साहब कृपाकरै हैं ताको देखाइ देइहौं ॥ ३६४ ॥
सुखको सागर मैं रचा, दुखदुख मेलो पांव ॥
स्थिति ना पकरै आपनी, चले रङ्क औ राव ॥३६५॥
श्रीकबीरजी कहै हैं कि मैंतो या बीजक ग्रन्थमें सुखको सागर रच्यो है
कहे साहबको बताइ दियो है तामें नहीं लगे दुःखमें पाँउ मेले है अर्थात् कहूं
ब्रह्ममें कहूं ईश्वरनमें कहूं नानामत में लागे है जहां याकी स्थिति है साहबमें
तिनको नहीं पकरै याही ते राजा रंक सब चले जायहैं कालखाये लेइहै ॥३६५॥
दुख न हता संसारमें, हता न शोक वियोग ॥
सुखहीमें दुखलादिया, बोलै बोली लोग ॥ ३६६ ॥
या संसार जो है सो चित अचितरूप साहबको है सो जो कोई साहबरूप
करि संसारको देखै है ताको न दुःख न शोकहै न वियोगहै साहबतो सर्वत्रपूर्ण है
ऐसो सुखरूप जो है संसार तामें मोर तोरमें परिकै दुखलादिया कहे दुःखभोगन
लग्यो औ वही मोर तोरकी बोली लोग बोलै हैं साहबको नहीं जानै हैं ॥३६६॥
लिखापढ़ीमें परे सब, यहगुण तजै न कोइ ॥
सबै परे भ्रमजालमें, डारा यह जिय खोइ ॥ ३६७ ॥
सब लिखापढ़ीमें परे हैं वेदशास्त्र तात्पर्य्य करिकै साहब को बतावै हैं सो
तो न जान्यो वादविवाद पढ़िपढ़ि करनलगे नये नये ग्रन्थ बनाय लेन लगे लिख-
नलगे वेदशास्त्रको अर्थ फेरि डारनलगे साहब मुख अर्थ जौन तात्पर्य्य करिकै
वेदशास्त्र बतावै हैं ताको छोड़ि अर्थ बदलै हैं या गुणको कोई नहीं छांड़ै
याही ते सब भ्रमजालमें परे आपने जियको खोइ डारचो ॥ ३६७ ॥