कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६ ) बीजक कबीरदास ।
रामनाममें छामात्रा है तामें प्रमाण ॥ रामनाममहाविन्ध्ये षड्भिर्वस्तुभिरावृत-
म् ॥ जीवब्रह्ममहानद्यैस्त्रिभिरन्यंवदामितं ॥ स्वरेणार्धमात्रेणदिव्ययामाययापिच
॥ इतिमहारामायणे ॥ और रामनामको जो अर्थ भूलिगये हैं तामें प्रमाण
सब मुनिन को भ्रमभयो श्रुतिनको प्रमाणदै कोई कहै हमारोमत ठीक है
कोई कहै हमारो मत ठीक है । तब सब मुनि वेदन ते पूछयो जाइ । वेदहू
विचारेउ कि सबमें तौ हमारही प्रमाण मिलैहै सोवेदहूको भ्रमभयो । तब
सबमुनि औ वेद ब्रह्माके पासगये । तबब्रह्मा ते पूंछयो तब ब्रह्मौके भ्रमभयों
कि, साँच मत साँच साहब कौन है । सो महादेवजी पार्वती जी ते कहै हैं
कि, तब सबकोई साहब श्रीरामचन्द्रको ध्यान कियो तब साहब कह्यो कि
यह बात सबके आचार्य जे संकर्षण है ते जानैहैं तिनके पास सबको पैठे
देहुवे समझाय देयँगे । तब ब्रह्मा की आज्ञाते सब संकर्षण रूप
शेषके इहांगये सो वेद उहां पूंछयो, संकर्षण ते, तब संकर्षण जी एक सि-
द्धांत जे परमपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं तिनको बतायो है राम नाम को यथार्थ अर्थ
तौन सदाशिवसंहिता के ये श्लोक हैं ॥
“ रामनाम्नोऽथमुख्योऽथभगवत्स्वेतप्रतिष्ठितम् ॥ विस्मृतंकंठमणिवद्वेदाश्रृणुततत्त्व
तः १ तात्पर्य्यवृत्त्याविज्ञेय बोधयामिविभागः ॥ रामनाम्निशुचिर्ज्ञेयाः षण्मात्रांत
त्त्वबोधकाः २ रामनाम्निस्थितोरेफो जानकीतेनकथ्यते ॥ रकारेणतुविज्ञेयः श्रीरामः
पुरुषोत्तमः ३ आकारेणतथाज्ञेयोभरतोविश्वपालकः ॥ व्यंजनेनमकारेण लक्ष्मणो
ऽत्रनिगद्यते ४ ह्रस्वाकारेणनिगमाःशत्रुघ्नःसमुदाहृतः ॥ मकारार्थोद्विधाज्ञेयःसानु-
नासिकभेदतः ५ प्रोच्यतेतेनहंसौवैजीवाश्चैतन्यावग्रहाः ॥ संसारसागरोत्तीर्णापुनरावृ
त्तिवर्जिताः ६ दास्याधिकारिणःसर्वेश्रीरामस्यमहात्मनः ॥ एतत्तात्पर्यमुख्यार्थाद-
न्यार्थोयोनभूपते ७ सोऽनर्थइतिविज्ञेयःसंसारप्राप्तिहेतुकः ॥ इतिसदाशिवसंहितायां-
विंशाध्यायेवेदान्प्रतिशेषवचनम् ॥ सो जौननाम साहब बतायो ताके औरई औ-
रअर्थकरिकै जीव संसारीहैगयेसाहबकोनजान्यो ॥ १९ ॥
दोहा—तेहि पाछे हम आइया, सत्य शब्द के हेत ॥
आदिअन्तकीउतपति, सोतुमसोंकहिदेत ॥ २० ॥