कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 65, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें( १४ ) बीजक कबीरदास ।
तौने कालते कहे वही कालमें काल पाइकै एकएक ब्रह्माण्डमें तीनतीन
देवता ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पन्नहोतभये सो कोटिन ब्रह्माण्डनमें कोटिन ब्रह्मा-
दिक भये तैं माया के उपदेश ते कहे मायाको ग्रहणकरिकै संसारमें चारि-
खानि जे जीव हैं तिन को सिरजिया कहे उत्पत्ति करतभये सो उत्पत्तिको
क्रम ब्रह्मोते पहिले कहिआये हैं ॥ १६ ॥
दोहा-चारिवेद षट्शास्त्रऊ, औ दशअष्ट पुरान ॥
आशा दै जग बाँधिया, तीनों लोक भुलान॥ १७॥
चारोंवेद, छवोंशास्त्र औ अठारहौ पुराणमें मायाजो है सो औरई और
फलकी आशा बताइकै औरई और नाना मतन में लगाइदियो और संपूर्ण
जगत् मुख अर्थकरिकै जगत्को बांधिलियों । साहबको भुलाय दियो ये सब
तात्पर्य कैकै साहबको कहैहैं सोसाहबकों न जानन पाये । ताते तीनों लोकके
जीव भुलायगये ॥ १७ ॥
दोहा-लखचौरासी धारमा, तहां जीव दियवास ॥
चौदह यम रखवारी, चारिवेद विश्वास ॥ १८ ॥
चौरासीलाख जो योनिहैं सोईहैं धारा ताहीमें जीवको बास देतभये
कहेवही चौरासीलाख योनिरूपी धारामें सबजीव बहे जाइहैं अर्थात्
नानारूप धारण करैहैं सो चारिवेदके विश्वासते कहे चारिवेदके मतते
नानामतहोतभये ॥ “ शतिलेत्वंजगन्माता शतिलेत्वंजगत्पिता ॥ ” इत्यादिक
नानादेवतनकी उपासनागुरुवालोग बतावत भये । वेद जो तात्पर्य्यकरिकै बतावै
है साहब को सो अर्थ न जानतभैये। औ चौदह यम जीवकी रखवारी करत भये
यहजीव निकसिकै साहबके पास न जानपाये। चौदह यमके नाममें प्रमाण ज्ञान-
सागरको॥ दुर्गदचित्रगुप्तबरियारा । ईतोयमके हैं सरदारा ॥ मनसा मल्लअपरबल
मोहा। कामसैनमकरन्दी सोहा॥चितचंचल औ अंधअचेता। मृतकअंधजोजीतेखेता ॥
सूर सिंह औरो क्रमरेखा । भावीतेजकालकापेखा ॥ अघनिद्रा औ क्रोधितअंधा ।
जेहिमाजीवजंतुसबबंधा ॥ परमेश्वर परबल धर्मराजा । पाप पुण्यसबते अळछा-
जा ॥ यह सब यमै निरंजनकीन्हा । लिखनीकागदरचिकै दीन्हा ॥ १ ॥ ”