कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुरुमुख ॥ परदेते पानी ढरियाकहे गुरुवालोग नये मंत्र बनायकै परदे
परदे उपदेशकियो औ सिखापनदियो कि काहूसों कहियो नहीं सब वेदशास्त्र
झूठे हैं जीवात्मै सत्य है ताही मानो या समुझायदियो सो वही धरे धरे जीव नर
कको गये जो साँचो राम नामहै ताको न जान्यो वही गुरुवनको बताओ मंत्र
ताहीके भरोसे सब पूजापाठ धर्मकर्म सब छांडिदियो कहैहै हमनिष्कर्म हैं और
यहबात नहीं जानैं है कि भगवान् पूजादिक ये कर्मनमें नहीं हैं तामें प्रमाण
श्रीकबीरजीको॥ “और कर्म सब कर्म हैं भक्ति कर्म निष्कर्म। कहैं कबीर पुकारिकै
भक्तिकरौ तजि भर्म”॥ सो देखो तो भाजीके लियेतौ बाजारमें मूड़फोरै हैं भगवा-
नकीभक्ति कारिबेको कहैहैं हम निष्कर्म हैं पिसानकै चौकडारि मालपुवा धरिकै
चौकाकरैं हैं आरतीकरैं हैं औ भगवान्की आरती करिबेको कहै हैं हमहीं मालिक
हैं हमारी आरती सब जने करतेजाउ सो हे सन्तो! विचारते तौ जाउ यह अपने
शरमा शरमीमें पचिमुवाहै या कहैहै कि हम गुरुवन को उपदेश न छांड़ेंगे या नहीं
जानै हैं कि या शरम में हमको औ हमारे गुरुवौ को यम घसीटिडारेंगे नरकमें
डारि देयहैं तब मालिक है कै न बचौगे तब कौन रक्षा करैगो साहबको तो जनबै
न कियो । जिन साहबको जान्यो है हनुमान् अंगद कबीरतैं अबलौं बने है तेहि
ते साहबको भजन करो जेहिते कालते बचिजाउ नहीं तो शरमा शरमीमें नर-
कमें पचिमरौगे । औ तुम भगवान्को नहीं मानौहौ भगवान्के पाछे नहीं चलौ
हौ सो ब्रह्म राक्षस होइगो तामें प्रमाण ॥ “नानुव्रजति यो मोहाद्व्रजन्तं जगदी-
श्वरम् । ज्ञानाग्निदग्धकर्मापि स भवेद् ब्रह्मराक्षसः” ॥ इति पुरुषोत्तम माहा-
त्म्ये॥औ सब झूठा है साहबको भजन साँचा है तामें प्रमाणकबीरजीको॥
“ कञ्चन केवल हरि भजन, दूजी कथा कथीर ।
झूठा आल जंजाल तजि, पकरो साँच कबीर ॥ १ ॥
जो रक्षक है जीवको, नाहिं करो पहिंचान ।
रक्षकके चीन्हे बिना, अंत होइगी हान” ॥ २ ॥
तेहिते तुम साहबको भजनकरो जाते साहब के लोकैजाउ जहां कालकी
गम्यनहीं है तांमें प्रमाण ॥