कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६०० ) बीजक कबीरदास ।
साहबको ज्ञान त रहित है जाइहै। सोतैं ऐसों बिगरि गयो है कि जो अब
दूध भयों चाहै तो आपने किये ते कौने हू भांति न होइ सकै है फिर जो होन
चाहै तो होइ कैसे ताको या युक्ति है कि, जाको वा छाछ है ताहीको पियाई
देइ तौ फिर वा दूध बनि जाइ है। तैसे जौने साहबको तू है तिनको जो रूप
गुरु बताइ देइ और तैं ओई साहब श्रीरामचन्द्रमें लगि जाई तौ पुनि तैं शुद्ध
जीव है जाइ ॥ १९३ ॥
केत्यो मनावैं पायँ परि, केत्यो मनावैं रोइं ॥
हिन्दू पूजैं देवता, तुरुक न काहुक होइ ॥ ३९४ ॥
श्रीकबीरजी कहैं हैं कि केतन्यो हिन्दू ते देवतनके पायँ परि मनावै हैं कि
हमारी मुक्ति ह्वैजाय औ नाना देवतनको पूजते हैं औ केतन्यो जे मुस्लमान
तिनको हाल आवती है औ साहब के इश्कमें रोवते हैं औ मानते हैं कि साहब
बेचून बेचिगून बेसुवा बेनिमून निराकारहैं सो जे देवतनको मनावतेहौ पायँ
परिकै तिनहीं की मुक्ति नहीं भई तिहारी मुक्ति कैसे होयगी देवता तो सब
सगुणहैं विष्णु सतोगुण के ब्रह्मा रजोगुणके रुद्र तमोगुणके अभिमानी हैं
मुक्त नहीं भये तौ तुमको कैसे मुक्त करेंगे सो जौन तीनों देवतनको अधिकार
दिये हैं सबको मालिक श्रीरामचंद्र तिनको भजनकरु तब मुक्ति पावैगो तहां
प्रमाण गोसाईंजीको॥"हरिहि हरिता विधिहिं विधिता शिवहि शिवता जिन दयो।
सो जानकी पति मधुर मूरति मोदमय मंगल भयो"॥ और मुस्लमानौ ! तुम
निराकार तौ मानौ हौ इश्क काकेपर करौ हौ सो जो साहबको रूप न मानौगे
तौ इश्क तुम्हारा झूठा ठहरि जायगा ताते बिचारौ तौ साहब रूप न होता तौ
मूसा पैगम्बर को छिगुनी कैसे देखावता ताते उसके रूपहैं परंतु मायाकृत
पाञ्चभौतिक नहीं हैं दिव्य रूपहैं याते निराकारकहैं हैं सगुण निर्गुणके परे जो
साहब श्रीरामचंद्र ताको बन्दाहोउ आपनेको जो मालिक मानौगे तौ बड़ी मार
सहौगे तामें प्रमाण ॥ “स्वामी तो कोई नहीं स्वामी सिरजन हार ॥ स्वामी
द्वै जो बैठिहैं घनी परैगी मार” ॥१॥ औ साहब निर्गुण सगुणके परे हैं तामें
प्रमाण ॥ सगुणकी सेवाकरौ निर्गुणका करुज्ञान ॥ निर्गुण सगुणके परे तहँ
हमारा जान ॥ १९४ ॥