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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 636

( ५९८ ) बीजक कबीरदास ।
पथिक जो विचारिकै न चलै तौ राह बिचारी कहाकरै वेद पुराण शास्त्र
येई सब राहैं हैं तिनको तात्पर्य यही है यहजीव साहबको अंशहै उनहींके
जानें संसारते छूटै है सो रामनाम को जपिकै साहबको हैरहै यह जो है आपनों
मारग तौनेको छोड़िकै उनारि उजारि कहे कोई ब्रह्ममें कोई ईश्वरमें कोई नाना
देवतन की उपासनामें फिरे हैं सोउनके जननमरण रूप कण्टक लागिबोई चाहैं
नरकरूप खोह गिरैचाहै औ जीवसाहबको अंशहै तामें प्रमाण ॥ "ममैवांशो-
जीवलोके जीवभूतः सनातनः" ॥ औ ब्रह्ममाया ईश्वर जगत् इनको विचारकरै
तौ भ्रममात्रहै कछू इनसे जीवको उद्धारनहीं होयहै तामें प्रमाण ॥ "ब्रह्मजीव
ईश्वरजगत ईसब अनमिलसैन ॥ निरवारे ठहरै नहीं भाखत झांईं बैन"॥ १८८॥
मूआहै मरि जाहुगे, बिन शर थोथे भाल ॥
परे करहारै बृक्षतर, आजु मरै की काल ॥ १८९ ॥
अरेजीवौ ! तुम केतनौ बार मरतआये हौ औ मरिजाउगे बिना शरकाहेते कि
तुम्हारे भालमें थोथे लिखे हैं बिना फलकें बाणसों तुम यहि संसार वृक्षतरे जो
बोलते बताते हौ सो परे कल्हारते हौ आजु मरिजाउ कि काल्हिमरिजाउ बाड़ा
कछू नहीं है ॥ १८९ ॥
बोली हमारी पूर्वकी, हमैं लखा नहिं कोइ ॥
हमकोतो सोई लखै, घर पूरुबका होइ ॥ १९० ॥
हमारी जो पूर्बकहे पहिलेकी बोली जो साहबकोरूप उपदेश करिआये
जीवको स्वरूप बतायआये सो कोई नहीं लखै है न हम को लखै है सो हमारी-
बाणीको तो सोई लखै है जो कोई पूरुबको कहे शुद्धजीव हैजाय जस पूर्बही
रह्यो है ॥ १९० ॥
जेहि चलतै रवदे परा, धरती होइ विहार ॥
सोइ सावज घामैं जरै, पण्डित करो विचार ॥१९१॥
जेहि जीवके चलतकहे निकसतमें यहशरीर रवदे कहे धूरिमें मिलिजाय है
पुनि वैहैजीव जो कहूं अवतरै है तब यहै शरीर को पाइकै धरती में विहा-