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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 635

साखी । ( ५१७ )
फहमै आगे फहमै पाछे, फहमै दहिने डेरी ॥
फहमै परजो फहम करत है, सोई फहम है मेरी॥१८५॥
गुरुमुख ।
फहमजो है ज्ञानस्वरूप ब्रह्म सोई आगे है सोई पाछे है सोई दहिने है सोई
डेरी कहे बायें है अर्थात् सर्वत्रपूर्णहै सो यहजोफहमहै ज्ञानस्वरूप ब्रह्म तौनेके
ऊपर ब्रह्मयाहूके परे साहब है फहम करै है कि वह ज्ञानरूप उनहींको प्रकाश
है याहूके परे साहब हैं तौन फहम मेरी है कहे वहज्ञान मेरोहै ॥ १८५ ॥
हद चलै सो मानवा, बेहद चलै सो साध ॥
हद बेहद दोनों तजै, ताको मता अगाध ॥ १८६ ॥
हद जो चलै है सो मानवाहै कहे उनको मान कहे प्रमाण है अर्थात् जो
जौने देवता की उपासना कियो सो तौने देवता के लोकगये वाको वहैभर
प्रमाणहै वतनैज्ञान होइहै औ जे बेहद चलै हैं ब्रह्ममें लगे हैं ते साधुहैं जो
ब्रह्मको साधन करिकै सिद्धि करिलेइ सो साधु सो हद जो है सगुणसंसार औ
बेहद जोहै निर्गुण ब्रह्म ये दोनोंको जे तजिकै निर्गुण सगुणके परे परम पुरुष
श्री रामचन्द्र के सेवक ह्वैरहे हैं ऐसे जे रामोपासक हैं तिनहीं के मत
अगाधहैं ॥ १८६ ॥
समुझैकी गति एकहै, जिन समुझा सब ठौर ॥
कह कबीर जे बीचके, बल कहि औरै और ॥१८७॥
जे रामोपासक निर्गुण सगुणको समुझिकै ताहूते परे साहब को जान्यों
तिनकी गति एकहै कहे एक साहबहीको सबठौर निर्गुण सगुणमें समुझै हैं
कबीरजी कहै हैं कि जे बीचकेहैं ते और और उपासना करै हैं और और
ज्ञानकरै हैं औ आपने आपनेदेवतनमें बलकै हैं कि येई सबके मालिकहैं॥ १८७॥
राह बिचारी का करै, पथिक न चलै विचारि ॥
आपन मारग छोड़िकै, फिरहि उजारि उजारि॥१८८॥