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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 633

साखी । ( ५९५ )
· साहब कहै हैं कि हमतो सबके अच्छेकी कही जांते कालते बचिजायँ परंतु
मोको कोई न जानत भयो सो तब भी अच्छा है अबभी अच्छाहै काहेते कि
युगयुगमें मैं आन नहीं होउँहौं वहीवही बनोहौं जो अबहूं मोको जानै तौ मैं
कालते बचायलेउँ तामें प्रमाण गोसाईंजीको ॥
दोहा ॥ "बिगरी जन्म अनेककी, सुधरै अबहीं आज ॥
होय रामको राम जपि, तुलसी तजि कुसमाज" ॥
औ कबीरजीने कह्यो है ॥
"कह कबीर हम युग युग कही । जबही चेतों तबहीं सही" १८०
प्रकट कहौं तौ मारिया, परदा लखै न कोइ ॥
सहनाछपाप्यारतर,को कहिवैरी होइ ॥ १८१ ॥
श्रीकबीरजीकहैं हैं कि जो मैं प्रकट कहौंहौं कि तुम साहबके हौ और के
नहीं हौ तौ मारन धावै है अर्थात् बादविवाद करै है औ जो परदे सों कहौ
हौं तौ कोई समझतै नहीं है काहेते नहीं समझै है