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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 632

( ५३४ ) बीजक कबीरदास ।
जैसे ऊसरमें बोवै घन बहुतौ बरसें परन्तु जामै नहीं है तैसे निराकार
धोखामैलख्यो फलकछू न हाथलग्यो वातो कुछ वस्तु ही नहीं है अनरुचेको नेहं
है अर्थात् बावड़ी प्रीतिकियो वातोप्रीति ही नहीं करै ॥ १७६ ॥
मैं रोऊं सब जगतको, मोको रोवै न कोइ ॥
मोको रोवै सो जना, जो शब्द विवेकी होय ॥ १७७॥
साहब कहैं हैं कि मैं सब जगतपर दया करिकै रोऊँहौं कि मेरो अंश
जीवमोको भूलिगयो ताते जगतमें जनन मरणरूपी दुःखसहै है औ जीवमोको
नहीं रोवै है कि हम अपने मालिकको भूलिगये नाना मालिक मानि नाना
दुःख पावै हैं सो मोको सो जन रोवै है जो शब्द जो रामनाम ताको विवेकीहो
य कि रकारके समीप मकार शोभित होईहै मैं साहबको हौं ॥ १७७ ॥
साहब साहब सब कहैं, मोहिं अंदेशा और ॥
साहबसों परिचय नहीं, बैठैगा केहि ठौर ॥ १७८॥
कबीरजी कहैं हैं कि साहब साहब तो सब जीव कहै हैं अर्थात् आपने
आपने इष्टदेवताको सबते परे कहै हैं कि येई सबके मालिकहैं सो येतो सब
एक एक मालिक बनाये हैं पै मोको या और अंदेशाहै कि जौन रामनाम
साहबको बतावै है तौने रामनामको जानि साहबते परिचयतो करिबै न किये
ये कौने ठोर बैठेंगे काके पास जायँगे अर्थात् जनन मरण न छूटैगो ॥ १७८॥
जिव बिन जिव बाचै नहीं, जिवका जीव अधार ॥
जीव दया करि पालिये, पंडित करहु विचार ॥ १७९॥
या जीव बिना जीव कहे सतगुरु बिना नहीं बाचै है जीवको जीव जो
सतगुरुहै सोई आधारहै सो जीवपर दया करि अर्थात् सतगुरुके शरणह्वै जीव
उद्धारकरो हे पंडित ! तुम बिचारकर देखो तो बिना सतगुरु संसार पार
न होउगे ॥ १७९ ॥
हमतो सबहीकी कही, मोको कोइ न जान ॥
तबभी अच्छा अच्छा अबभी, युग युग होंहुँनआन १८०