कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाखी। (५९३)
मूरुख सा क्या बोलिये, शठसों कहा बसाय ॥
पाहनमें क्या मारिये, चोखा तीर नशाय ॥ १७३ ॥
मूरुख कौन कहावै है कि साधुनके समुझायेतें सूझै परन्तु बूझै नहीं है
तासों क्याबोलिये । शठकौनकहावैहै कि चाहे नीकौ कोऊ बतावै परन्तुछाड़ै न
हठकीन्हे वाहीमें लागरहै । जौन गुरुवा लोग पहिले बतायनिहै चाहे कूपौमा
गिरिपरे पै छाडै न सोऐसेलोगन ते कहा बसाय उनको ज्ञानदीन्हे ज्ञानौ खराब
होयगो पाहनके मारे तीरही टूटैगो शठ मूरुख नहीं समुझै तामें प्रमाण ॥
“पानी कोपाषाण, भीजै तौ बेधै नहीं ॥ त्यों मूरुखको ज्ञान, सूझै तौ
बूझै नहीं” ॥ १७३ ॥
जैसे गोली गुमजकी, नीच परे दुरि जाय ॥
ऐसे हृदया मूर्खके, शब्द नहीं ठहराय ॥ १७४ ॥
जैसे गुम्मजमें जो गोलीमारिये तौ ऊँचेपरै ढरकिजायहै ऐसे मूरुखके हृद्-
यमेंशब्द रामनाम केतौ उपदेशकारिये परन्तु ठहराय नहीं है एकघरीभर तौ
ज्ञानरहो फिरि ज्योंकोत्यों ह्वै गयो ॥ १७४ ॥
ऊपरकी दोऊ गई, हियकी गई हेराय ॥
कह कबीर चारिउगई, तासों कहा बसाय ॥ १७५ ॥
ऊपरकी आँखिनते यादेख हैं कि साहबको भजिकै हनुमानादिक अजर
अमर ह्वैगये जिनकी पूजा देवता करै हैं सब सिद्धिको प्राप्तहैं कालशक्र बिष्णु
सबते अधिकहैं औ हियेकी आँखिनते देखै हैं कि हाथिनको पति ऐरावतहै पक्षि-
नको पति गरुड़है भक्तनमें महादेवपति हैं मनुष्यनमें भूपति है ऐसे सब ईश्व-
रनके मालिक श्रीरामचन्द्र हैं तिनको नहीं भजन करै है सो श्रीकबीरजी कहै
हैं कि जाकीभीतरौबाहरकी आँखिफूटीगई तासोंकहाबसाय ॥ १७५ ॥
केते दिन ऐसे गये, अन रुचे को नेह ॥
बोये उसर न ऊपजै, जो घन वरसैं मेह ॥ १७६ ॥
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