कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाखी । ( ५९१ )
मूरख ते केतें संसार बजारमें चलिगये पै जाते साहब को ज्ञान होई ऐसो जों
रामनाम हीरासो न लीन्हे अर्थात् यह रामनाम साहबको बतावन वारो है सों
कोई न समझ्यो । सो जाते साहबको ज्ञान होयहै ऐसो रामनाम हीरा ताके
जे पारखी रहे ते राम नाम हीराको जानिकै उठायो जाते साहबको पहिंचा-
निकै मुक्त ह्रै गये। अथवा रामनाम ऐसो हीरा बजार में कहे संसार में परि छार
में लपट्यो है अर्थात् ज्ञान कांड,कर्म कांड और योग कांडमें लग्यो है और राम
नाम में नही लग्यो हैं, जो साहब को बतावनवारो है जाते मुक्ति ह्रै जाई छार में
कहा लपटो है ? कि, ज्ञान काण्ड कर्म काण्ड आदि कर्मनमें राम नामई को मानै
हैं याही ते काहू को नहीं जानि परै है । राम नाम को और और सिद्धिन में
लगाई देइ हैं तामें प्रमाण श्रीगोसांई जीको ।
नाम जीह जपि जागहिं योगी । विरति बिरंचि प्रपंच वियोगी ॥
ब्रह्म सुखहि अनु भवहि अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा ॥
जाना चहै गूढ मत जोऊ । नाम जीह जपि जानहिं तेऊ ॥
साधक नाम जपहिं लै लाये । होइ सिद्ध अणि यादिक पाये ॥
जपहिं नाम जन आरत भारी । मिटहि कुसंकट होंहि सुखारी ॥
सो येही रामनामको लैकै सब साहबको जान्यो है तामें प्रमाण ॥
श्रीकबीर जीको रेखता ।
रामको नाम चौ मुक्तिका मूल है निचोर रस तत्त्व छानी ।
रामको नाम षट शास्त्रमें मथलिया राम षट दर्शमें है कहानी ॥
रामको नाम लै ध्यान ब्रह्मा किया रंरकारै धुनि सुनि मानी ।
कहैं कबीर अवगाह लीला बड़ी रामको नाम निर्बाण बानी ॥
रामको नाम लै विष्णु पूजा करैं रामको नाम शिव योग ध्यानी ।
रामको नाम लै सिद्ध साधक जियो जियो सनकादि नारदहु ज्ञानी॥
रामको नाम लै राम दीक्षा लिया गुरु वशिष्ठ मिलि मंत्र दानी ।
रामको नाम लै कृष्ण गीता कथी मथी पारथ नहिं ममजानी ॥१६८॥
हीराकी ओबरी नहीं, मलयागिरि नहिं पांति ॥
सिंहनके लेहड़ा नहीं, साधु न चलैं जमाति ॥१६९॥