कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५८२ ) बीजक कबीरदास ।
मैं जौनजौनै राहनमें वहसाँपिनि बैठी रहीं है तौने तौने राहनको काटिकै कहैं
बरायकै औरे राह ह्वै चलो गयो ॥ १३९ ॥
सांप बीछिको मंत्र है, माहुर झारे जाय ॥
बिकट नारिके पाले परा, काटि करेजा खाय॥१४०॥
साँपबीछीको बिषमंत्रन ते झारे जायहै औ वह बिकट नारि जो माया है
ताकेंपाले जो पर्यो ताको करेजा काटिकै खायलेइ है अर्थात् साहबके ज्ञाना-
दिकं जे अंतःकरणमें हैं तिनकोखाय है सोई मायाको रूप कहैं ॥ १४० ॥
तामस केरे तीन गुण; भौंर लेइ तहँ वास ॥
एकै डारी तीन फल, भाँटा ऊँख कपास ॥ १४१ ॥
आदितामस जो है अज्ञान मूल प्रकृति तामें रजोगुणी तमोगुणी सतोगुणी
तीनफल लगेहैं सो सतोगुणी ऊँखहै जो ऊँखचुह्यो तौ पहिले रस पान कियों
कहे यज्ञादिक कर्म्म कियो स्वर्ग में जायकै अप्सरानके साथ सुखकियो जब
पुण्यक्षीणभयो तब फेरि संसारमें परे सो यहै हाथमें लग्यो फिरि चौरासीमें भटक-
नलग्यो । औ रजोगुणी कपास है कपासकोलियो कपरा बिनायो पहिरचो ह्याँई
फटिगयो तैसे रजोगुणी कर्म्म कियो तामें राजाभयो सुख भोगकियो दियों
लियो बड़ो यश कियो फेरि फेरि मरिकै जैसो कर्म्मकियो तैसो भयोजाय । औ
तमोगुणी कर्म्मभाँटाहै टोरचो तब कांटालग्यो औ जब खायो तब पुरुष शक्ति
की हानि ह्वैगई अखाद्य लिखै हैं द्वादशी त्रयोदशी इत्यादिक दिनमें जो खायों
तें नरक को गयो ऐसे तमोगुणी कर्म्मते काहूको मारचो तौ मरिगयो औ
पापलग्यो राजाबाँधिकै शूली दियो मारो गयों दुःख पायो सो इहां दुःख पायौं
औ वहां नरकमें दुःखपायो ॥ १४१ ॥
मन मतंग गैयर हनै, मनसा भई सचान ॥
यंत्र मंत्र मानै नहीं, लागी उड़ि उड़ि खान ॥ १४२ ॥
मनरूपी जो हाथी है मतवार सो गैयर कहे आपने अरतेकहे हंठते गवा जो
है जीव अर्थात् साहबको भूलिगयो जो है जीव अथवा गैयर कहे बड़ा जो है