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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 618

( ५८० ) बीजक कबीरदास ।
बिग्रहते सर्वत्र साहिबहीहैं यह भावना करिकै सब जीवनते निर्बैररहु साधु मतकों
यही सारांशहै सब साहबके शरीरहैं तामें प्रमाण ॥ “खं वायुमग्निं सलिलंमहीञ्च
ज्योतींषि सत्त्वानि दिशोद्रुमादीन् । सरित्समुद्राँश्च हरेःशरीरं यत्किञ्चभूतं प्रण-
मेदनन्यः । ” चित् जो है जीव सोऊ शरीरहै तामें प्रमाण ॥ “यश्चात्मनि तिष्ठ
न्नयमात्मानं वेद यस्य आत्मा शरीरम्” ॥ १३३ ॥
पक्षा पक्षी कारणे, सब जग रहा भुलान ॥
निरपक्षै है हरि भजै, तेई संत सुजान ॥ १३४ ॥
और तो सबमायैमें भुलानहै जिनके कछू समझहै ते आपने आपने मतको
पक्ष कीन्हे हैं आनको पक्ष खण्डन करि दौरै हैं सो जे पक्षापक्षी छोड़िकै साहबको
भजै हैं तेई सुजान सन्तहैं ॥ १३४ ॥
माया त्यागे क्या भया, मान तजा नहिं जाय ॥
जेहि माने मुनिवर ठगे, मान सबनको खाय ॥ १३५ ॥
सन्तलोग जो मायाको छोड़िउ दिये तौ कहा भयो मान बड़ाई तौ छोड़िबे
न कियो याही चाहैं कि, हमारो मान होय सो जौने मानमें मुनिवर ठगिगये
हैं सोई सबको खाये लेइहै सो हम पूछै हैं कि जो तिहारो बड़ो मान भयो बड़ी
बड़ाई भई कि फलानेके समान उपासनामें कोई नहीं है ज्ञानमें विद्यामें कोई
नहीं है तौ यासों कहाभयो जाके निमित्त घरछोड़्यो सोतो मिलबई न भयो तेहितें
जो कोई साहबके मिलिबे की संसार छूटिबेकी बात कहै तौ मानिलेइ चाहै
आपने मतको होइ चाहै बिराने मतको होइ काहेते कि साधुको मत यही है
कि संसारछूटै साहब मिलैं औ मानै प्रतिष्ठा भये साधुकहावै या कौने शास्त्रमें
लिखाहै तेहिते साधु वही है जो साहबको जानै ॥ १३५ ॥
घुंघुची भरजो बोइया, उपज पसेरी आठ ॥
डेरा परा काल घर, सांझ सकारे बाठ ॥ १३६ ॥
— यहशरीररूपी क्षेत्रकैसो है कि जो घुँघुची भर बोइजाय अर्थात् उठै तौ आठ
पसेरी कहे मन उत्पत्ति होयहै कालके घरमें डेरा परयो है तेहिते यहशरीरकों