कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाखी । ( ५७७ )
तीनिलोकमें चोरीहोत भई सबको सर्वस्वैलैलियो सो ऐसों जो बिना
मूड़को चोर निराकार ब्रह्म सो काहू को न चीन्हिपर्यो अथवा बिनमूड़कों चोर
छिन्नमस्ता देवीके उपासक ते अपनेहूं को भावना करै हैं कि, हमारो मूड़ नहीं
है काहेते कि ॥ "देवो भूत्वा देवं यजेत्" ॥ यह लिखै है ते शाक्त काहूको नहीं
चीन्हिपरै हैं मायामें डारिकै सब जीवको भरमाइ देइ हैं ॥ १२५ ॥
चक्की चलती देखि कै, नयनन आया रोइ ॥
दो पट भीतर आयकै, साबित गया न कोइ॥ १२६ ॥
पुण्य औ पाप दूनों चक्की हैं कहे चकरी हैं तामें द्वैत जो है हम हमार सों
किल्ली है तौनै चक्कीके दूनों पटके भीतर आयकै साबित कोई नहीं गया है
पीसिही गयो है जो कोई साहबको सर्वत्र चिदाचित् रूपते देखै है सोई बाचै है
तामें प्रमाण ॥ "पापपुण्य दुइ चक्की कहिये खूँटा द्वैत लगाया है। तेहि चक्की
तर सबै पीसिगे सुरनरमुनि न बचाया है"॥ और प्रमाण सायर बीजकको।
" चक्की चली राम की, सब जगपीसाझारि ॥
कह कबीर ते ऊबरे, जे किल्ली दियो उखारि " ॥ १२६ ॥
चारि चोर चोरी चले, पग पनहींउतारि ॥
चारो दर थून्हीं हनी, पण्डित कहहु विचारि ॥१२७॥
चारि चोर जे हैं विश्व तैजस प्राज्ञ तुरीय ते चोरीको चले अपनी अपनी
पनहीं जो है बिचार ताको उतारिकै कहे छोड़िकै औ चोर चलै है तब पनहीं
उतारिकै छुपाजाय है तैसे येऊ चलै हैं सो विश्वाभिमान कर्म्मकाण्डकी थून्हीं
गाड़ी औ तैजस अभिमान उपासनाकाण्डकी थून्ही गाड़ी औ प्राज्ञाभिमान योगकी
थून्ही गाड़ी औ प्रत्यगात्मा तुरीय अभिमानने ज्ञानकाण्डकी थून्ही गाड़ी सो ताही
को बिचार पण्डितजन करने लगे। अथवा चोर जो है मन बुद्धि चित् अहङ्कार तें
बिचार रूप पनहींको उतारिकैं चोरीको चले सो मन सङ्कल्प बिकल्पकी थून्ही
गाड़ी औ चित्त अनुसंधानकी थून्हीगाड़ी औ बुद्धि निश्चयकी थून्ही गाड़ी औ
अहंकारैं अहंब्रह्मकी थून्हीगाड़ी सों ताहीको सब पण्डित बिचार करने लगे सों
कहैं हैं । मनतो सङ्कल्प बिकल्प करने लग्यो कि संसार कौनी भांति ते छूटै, औ
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