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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 612

( ५७४ ) बीजक कबीरदास ।
हैं सो मानिकै रामनाम कहिकै संसार छोड़िदें फेरि जब यमके सोंटा लगेंगे तब
न कहो कहि जायगो तामें प्रमाण॥ “बहुरि न बनि है कहत कछु जब शिरलगिहै
चोट ॥ अबहीं सब यकठौरहै दूधकटोरोटोट” ॥ ११७ ॥
एक कहौं तौ है नहीं, दोय कहौं तो गारि ॥
है जैसा तैसा रहै, कहै कबीर विचारि ॥ ११८ ॥
साहब कहै हैं कि हेजीव! जोमैं तोकों एककहौं कि ब्रह्मई है सब तैंहीं है तौ
वेदमैं लिखै है किं॥ “सत्यं ज्ञानमनंतं ब्रह्म इति श्रुतिः”॥ ब्रह्म तो ज्ञानमयहै सो जो
ब्रह्म हो तो तौ मायामें बद्ध ह्वैकै कैसे संसारी होतो औ जो दोय कहौं कि तैं
काहू ईश्वरकोदास है तौ गारी तोको परैहै काहेते कि तैं तो मेरो अंशहै सो
हेकबीर कायाके बीर जीव बिचारिकै देखु तो तैं सनातनको मेरो अंश है दासहै
औरको नहीं है तामें प्रमाण ॥ “ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः” ॥
औ मैं मालिक एकईहौं दूजो नहीं है तामें प्रमाणचौरासीअंगकीसाखी ॥
“साईं मेरा एक तू और न दूजा कोई ॥ जो साहब दूजा कहै, सो दूजा
कुलको होइ ॥ ११८ ॥
अमृत केरी पूरिया, बहु विधि लीन्हे छोरि ॥
आप सरीखा जो मिलै,ताहिं पिआऊं घोरि ॥११९॥
साहब कहै हैं कि अमृतपुरिया जो या रामनाम सो मैं बहुत भाँतिते छोरि
लीन्हेहौं । और जो दीन्ही पाठहोय तौ यह रामनामकी पुरिया छोरि दीन्ह्यो है
कहे बहुतविधिते प्रकट करिदीन्ह्यो है कि यही संसारते छोड़ावनवारो है दूसरो
नहीं है सो आपसरीखा जो मोको मिलै ऐसी भावना करतहोय किं मैं साहब
को अंशहौं दासहौं सखाहौं दूसरेको नहींहौं ताको मैं रामनामकी पुरिया घोरिकै
पिआइदेउँ कहे अर्थ समेत बताय देउँ औ पुरिया रामनामकी दैकै संसाररोग-
मिटायदेउँ औ रामनाम औषध है तामेंप्रमाण ॥ “राम नाम एक औषधी सत-
गुरु दिया बताय ॥ औषध खावै पथकरै, ताकी वेदन जाय ॥ ११९ ॥
अमृत केरी मोटरी, शिरसे धरी उतारि ॥
जाहि कहौं मैं एक हौं, मोहिं कहै द्वै चारि ॥ १२० ॥