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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 605

खोजैहैं ये छुवतही मरि जायेंगे । अर्थात् धोखा ब्रह्म उपदेशदैतै में गहि लेइँगे
सो अबै तौ भला बद्धै भरिहैं नित्यबद्ध नहीं हैं जो कहूं साधुते भेंट ह्वैजाय
तो उबारहू ह्वैजाय जब धोखा ब्रह्म में लागैगो तब वाको न छोड़ैगो साहब
को मत खण्डन करैगो सो तुम ऐसे मरेनको काहे मारौहौ ॥ ९७ ॥
बिरह भुवंगम पैठिकै, कीन करेजे घाव ॥
साधुन अंग न मोरिहै, जब भावै तब खाव ॥ ९८ ॥
बिरहरूपी भुवङ्गम कहे साहबको अप्राप्तरूपी जो भुवङ्गम है सो पैठिकै
करैजेमें घाव करतभयो अर्थात् उत्पत्ति प्रकरणमें साहबकी अप्राप्ति जीवनको होत
भई जेहिते साहबते विमुख संसारी ह्वै गये । अथवा गुरुवालोग कानमें लगिकै
नाना मत नाना उपासना बताय करेजेमें घाव करिदियेहैं । अर्थात् औरईमें
लगाइके साहबके मिलबेके द्वारको निरोध कारिके साहबकी अप्राप्तिको उपाय
अच्छी प्रकार करते भये अर्थात् साहब ते बिमुख करिदिये । सो जेते असा-
धुरहे साहबकी भक्तिको कौने जन्मको संस्कार उनको न रह्यो तेतो मारेपरे
औ जे कौनेहू जन्ममें साहबको पुकार्योहै उपासना कियो है धोखेहु कबइ एकबार
सत्यप्रेम के साथ साहब को स्मरण कियोहै सो वाकी वासना बढत बढत बढ़
जायगी आखिर साहबको जानिकै साहबको प्राप्त होय जायेंगे । गुरुवा लोग
जब चाहें तब उनको खातरहैं, धोखामें लगावतरहैं धोखामें कबहूं न लगैंगे ।
ऐसो जो साधु सो साधु कबहूं न अङ्गमोरैगो काल उनको जब चाहै तब खाय,
वे जब जन्मधरेंगे तब साहिबै की उपासना करेंगे उपासना भये सिद्ध करि साहबके
पास पहुंचेंगे । तामें प्रमाण “अनेक जन्म संसिद्धिस्ततो याति परां गतिम्” ॥
जे धोखेहू साहबको जान्यो है ते शरीर धारन कारिके चौरासीमें नहीं जाइ हैं
और जो साहबको नहीं जानै हैं साहब को स्मरण नहीं कियौहै जे संसार मेंही
लगेरहैं हैं ते चौरासीमें बारम्बार पड़ेंगे। साहबको भजन करनवारो चौरासी नहीं
जाइहै तामें प्रमाण । चौरासी अंगकी साखीको ॥ “ भक्त बीज पलटै नहीं,
जो युग जाहिं अनंत ॥ नीच ऊंच घर अवतरै, होय संतको संत ” । अथवा
[सा]हबकी अप्राप्तिते जीव सब संसारी भये । ते जीवनमें जे साधु भये साहब