सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 60

आदिमंगल। (९)
दोहा-योग मया यकु कारनो, ऊजो अक्षर कीन्ह ॥
या अविगति समरथकरी, ताहि गुप्त करि दीन्ह॥७॥
कारण रूप सुरति औ योगमाया गायत्री ये जे दुइइच्छा हैं ते वे पांचों ब्र-
ह्माको करती भई सो सर्वत्र तो यह सुनै हैं कि ब्रह्मते सब होइ है औ यहांइन-
ते ब्रह्म होईहै पांचौ, यह बड़ो आश्चर्य है। यह अबिगति समर्थ जे परमपुरुष
श्री रामचन्द्र हैं ते जब सुरति दियो है तब ये सब भये हैं । तिनको गुप्त करि
दियो अर्थात् इन्हीं पांचौ ब्रह्ममें औ जीवमें नामको अर्थ लगाय दियो है तें
पचहुनको बतावैहै ॥ ७ ॥
दोहा-श्वासा सोहं ऊपजे, कीन अमी बंधान ॥
आठ अंश निरमाइया, चीन्हों संत सुजान ॥ ८ ॥
यह सोहंशब्द वह परम पुरुष जो है समष्टिजीव ताके श्वासाते उपज्यो
सोई बतावैहै कि, "सोहं कहे सः अहं सो जौह अनुभवगम्यब्रह्मसो मैंहौं" औ
वही आदिपुरुष समष्टि जीव श्वासा ते अमीबंधन करतभयो कि इनकी मिठाई
पाइकै लोग लोभायजायँ कौन अमी बंधान करत भयो वही श्वासाते आठअंश बना-
वतभये, कहेआठौ सिद्धि निकासतभये आठौ सिद्धिकेनाम ॥ "अणिमामहिमा
चैव गरिमालघिमातथा । प्राप्तिः प्राकाम्यमीशित्वंवशित्वंचाष्टसिद्धयः ॥"
अथवाआठअंश निरमाइया कहे आठ प्रधान ईश्वर प्रकटकियो तेई परम पुरुष
समष्टि जीवके मंत्रीभये। तामेंप्रमाण महातंत्रमें महादेवको बाक्य ॥ "काली-
च्चकौशिकीविष्णुः सूर्योहेंगणनायकः" ॥ "ब्रह्माचभैरक्योबई छबराइति कीर्ति-
ताः १ यह प्रमाण शतानन्दभाष्य में विस्तार कैकैहै सो हेसंतसुजानौ तुम
चीन्हत जाउ वह जोसार शब्द रामनामहै सो साहब समष्टि जीव पुरुषको
बतायो सो सुंन्यो औ साहबको न जान्यो धोखाब्रह्मरूप आपहैकै वाको औरई
जगद्रूप अर्थ निकालिलियो । औ वह जो सोहं शब्द प्रकटभयो सो संकर्षणहै
काहेते कि, सोहंशब्द जीवमें घटित होईहै कि, वह जीव जौहै सोई बिचारकरै
है कि, सो जौहै ब्रह्म सो अहंकहे महीं हैं एक और दूसरो कोई नहीं है।