सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 588, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 588

( ५४६ ) बीजक कबीरदास ।
जीव बहुत दिन समाधि लगाइकै शून्यमें हीठिया कहै भ्रमत भये कि,
हमारो जन्म मरण छूटै । सो हजारन कल्प समाधि लगाये रहे जब समाधि
उतरी तब पुनि जैसेके तैसे हैगये । अथवा हजारन बर्ष ब्रह्ममें लीनरहे जब
सृष्टि भई तब पुनि संसाररूपी गाड़में परिकै पछितान लगे । पछिताइबो कहा
है कि वही बासना लगीरही ताते पुनि नाना साधन करनलगे कि हमारो जन्म
मरण छूटै ॥ ४४ ॥
कबिराभ्रमनभाजिया, बहुविधि धरियाभेव ॥
साईंके परिचयविना, अन्तररहिगोरेख ॥ ४५ ॥
कबीर जे हैं कायाके बीर यहजीव सो बहुत भांतिके वेष धरत भयो योगी
ह्वैकै योग करत भयो, ज्ञानी ह्वैकै ज्ञान करत भयो, भक्त ह्वैकै भक्ति करत भयो
कर्मकाण्डी ह्वैकै, कर्म करत भयो पै जिनको यहजीव अंश है ऐसे जे हैं सांई
परमपुरुष श्रीरामचन्द्र तिनके बिना जाने याको भ्रम न भाजत भयो । जो मुक्त
हू ह्वै गयो आपने को ब्रह्महू मानतभयो तो मूलाज्ञानरेख याके रहीगई काहेतें
कि, यह जाको है ताको तो जान्यो नहीं योग कियो, ज्ञान कियो भक्ति कियो, औ
नाना कर्म कियो, ताते पुनि संसारहीमें पर्यो, कौन रक्षा करै, रक्षकको तों
बिसराइ दियो ॥ ४५ ॥
बिनडांड़े जग डाँड़िया, सोरठ परिया डांड ॥
बांटन हारा लोभिया, गुरते मीठी खांड ॥ ४६ ॥
यह संसारमें जीव बिना काहूके डांड़े डांड़िया कहे सब डारि जाते भये ।
अर्थात् आपनेही कर्मते साहबको ज्ञान भूलिगये । औ सोरठ या देश बोली है ।
सोरठै फल देउ दशउ फल देउ सो ये सोरठै उपाय बतायो चारि वेद छःवेदांग
छःशास्त्र, ई सोरठते ब्रह्मा साहब को उपदेश इनको कियो, पै ये सब अपनें
अपने कर्ममें लगिगये । उनको वा सोरठकहे सोरठै जौन ब्रह्मा उपाय बतायो
तौन उनको डांडपर्यो । डांड़ वह कहावै है जौन बन कटिके मैदान हैजाय है
सो उनको चारि वेद छःवेदांग छःशास्त्र ई जे सोरठ हैं ते डांडपर्यो कहे वामें
साहब को खोज न पायो । साहबको बिचार उनको दिखाइ न पर्यो । अनतही