कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहै नी ओंकार पञ्चमपद गांयत्री है बचनमें नहीं आवैहै ॥४॥ पंचम पद गांयत्री
नाम वेदहै तामें प्रमाण ॥ “निद्रादौ जागरस्यांते यो भाव उपपद्यते ॥ तम्भा-
वं भावयेन्नित्यमक्षयानंदमश्नुते”॥ औ कैवल्य शरीर एक तत्त्वको है चित्त मात्र
है औ जौन ब्रह्मको छठों शरीर मानि राख्यो सो निस्तत्त्व है सो वाको भ्रमहै,
कुछबस्तु नहीं है । सो जो कोई रामनामको स्मरण करत साहबको जान्यो
औ पांचो शरीरको त्यागकियो तब साहब हंसशरीर जीवको देइहै जो मनवचनमें
नहीं आवै है । सो हंसशरीर अनिर्वचनीयहै रसरूप है वह निस्तत्त्वहूसे परैहै
जब प्राकृत रसजोहै सोऊ व्यंजनावृत्ति करिकै जानोपरेहै तौ अमाकृत जो
मनवचनके परैहै वाको कोई कैसेजानै । सो तौने हंसशरीरमें प्राप्त ह्वै कै
साहबके पासजाइक फिरिनहीं आवैहै । उहां मायामनादिकनकी पहुंच-
नहीं है सो साहबकहैं कि हे जीव ! हंसस्वरूप जो छठौं शरीर तिहारो सो
हमारे पास है तू कहां मनादिकन में लगिकै बिगरे जाउहौ तुम हमारेपास
आवो । और अर्थ इनको स्पष्टै है अंतमें कछु अर्थ खोले देइ हैं । सो श्रीक-
बीरजी कहै हैं कि, षट जे हैं छयो शरीर तिनको रैसा कहे झगरा है सो
मेटो । जौने ब्रह्म प्रकाशमें तुम भरे रहेहौ सो वाको छठौ शरीर आपनो मानो
हौ सो तिहारो शरीर नहीं है, वामें परे तो पिशाचवत् उन्मत्तवत् है जाइ है
जाको भूत लगे है औ जो उन्मत्त होइ है ताको यथार्थ ज्ञान नहीं होइ
है । सो ऐसा गुरु करो जो साहबको बतावै तब आपनो छठा शरीर हंसस्व-
रूप पावोगे लोकमें जो साहब देइ है तौने इहां साहब कह्यो है कि, छठी
तिहारीही जगा कहे छठौं शरीर हंसस्वरूप हमारी जगह में कहे हमारे पास
है सो हमको जानोगे कि, वही ब्रह्म है तब हमारे दिये पावोगे जौन छठौं
शरीर तुम मानिराख्यो है औ खोजौहौ सो तिहारो नहीं है ताते तुम्हारो कार्य
न सरैगो ॥ १ ॥
शब्द हमारा तुम शब्दका, सुनि मति जाहु सरक्खि ।
जो चाहो निज तत्त्व को, तौ शब्दै लेहु परक्खि ॥२॥
साहब कहै हैं कि, शब्द जोहै हमारा रामनाम तौनेही शब्द के तुमहौ
सो रामनाम को सरैखिकै कहे बिचारिकै माया ब्रह्म में मतिजाहु । जो निज-