कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाखी। (५२७)
पंचदेहका निर्णय ॥
एकजीवको स्वतःपद, बुद्धिभ्राँति सोकाळ ।
कालहोइ यहकाल-रचि, तामें भये बिहाल ॥
बीहाले को मतो जो, देउ सकल बतलाय ।
जाते पारख प्रौढ़ लहि, जीव नष्ट नहिं जाय ॥
करि अनुमान जो शून्यभो, सूझै कतहूं नाहिं ।
आपु आप बिसरो जबै तन बिज्ञान कहिताहि ॥
ज्ञान भयो जाग्यो जबै, करि आपन अनुमान ।
प्रतिबिंबित झाईं लखै, साक्षी रूप बखान ॥
साक्षी होय प्रकाश भो, महा कारण त्यहि नाम ।
मसुर प्रमाण सो बिम्बभो, नील बरण घन श्याम ॥
बढ़्यो बिम्ब अध पर्व भो, शून्याकार स्वरूप ।
ताको कारण कहतहैं, महँ अँधियारी कूप ॥
कारणसों आकार भो, श्वेत अँगुष्ठ प्रमान ।
वेद शास्त्र सब कहतहैं, सूक्ष्म रूप बखान ॥
सूक्ष्मरूपते कर्मभो, कर्महिंते यह अस्थूल ।
परा जीव या रहटमें, सहै घनेरी शूल ॥
संतौ षट प्रकारकी देही ।
स्थूल सूक्ष्म कारण महँकारण केवल हंस कि लेही ॥
साढ़े तीन हाथ परमाना देह स्थूल बखानी ।
राता बर्ण बैखरी बाचा जागृत अवस्था जानी॥
रजोगुणी ओंकार मातृका त्रिकुटी है अस्थाना ।
मुक्तिश्लोक प्रथम पद गायत्री ब्रह्मा वेद बखाना॥
पृथ्वी तत्त्व खेचरी मुद्रा मग पपील घट कासा ।
क्षए निर्णय बड़वाग्नि दशेंद्री देव चतुर्दश बासा ॥
१ इस ग्रन्थमें षट्देह को बर्णन है पर याको नाम पंचदेहका निर्णयहै याका कारण
यहहै कि, हंसदेह को दूसरे देहन के साथन मिलाय अलग माने हैं ।