कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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अथ साखी ।
जाहिया जन्म मुक्ता हता, तहिया हता न कोइ ॥
छठी तिहारी हो जगा तू कहँ चला विगोइ ॥ १ ॥
गुरुमुख ॥ जीवसों साहब कहै हैं जहिया कहे प्रथम जब तुम जन्मते
मुक्त रह्यौहै कहे जन्ममरणते छूटे रह्यौहै तहिया कहे तब हता न कोय कहै ये मना-
दिक नहीं रहे । जो जहिया जन मुक्ता हता या पाठहोय तो साहब कहै हैं
कि हे जन हमारे दास जब तुम मुक्त रह्यो है तब ये मनादिक कोई नहीं रहे ।
अरु बिज्वर गुणातीत चिन्मात्र मेरो अंश सनातनको या स्वरूपते रह्यो है ।
छठई देइ हमारे पास है तू कहां विगरो जाइ है मनादिकनमें लगिकै तैं कैवल्य
शरीरमें टिकिकै हमारे प्रकाशमें स्थित रहे हमको नहीं जाने याहीते माया