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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 563

बिरहुली । ( ५१९ )
ते फूल कहे तौन जो धोखा ब्रह्म सो भक्तनको बन्दै है अर्थात् खुलो नहीं
है वै धोखा में नहीं परै है काहेते वाको बांधिकै कहे खण्डन करिकै राउर जो
साहबको महल है तहांको जाहि हैं औ जे सन्त धोखा ब्रह्म रूप फूल लेहि हैं
अर्थात् ब्रह्म विचारमें जे शांत भे साहबको भूलिगे ते बेतल कहे बेताल भुतहा
सांप ऐसो जो धोखा ब्रह्म तौनेते डसिगे । धुनि या है जाको सांप डसै है ताको
स्वरूप भूलि जाइ है सांपै बोलै है ऐसे जे धोखा ब्रह्मवारे हैं तिनहूं आप-
नोस्वरूप भूलिगये कहै हैं हमहीं ब्रह्म हैं ॥ ८ । ९ ॥
बिषहरमंत्रनमानबिरहुली।गाडुरिबोलैआरबिरहुली॥१०॥
विषकीक्यारीबोयोबिरहुली।अवलोरतपछितायबिरहुली॥११
जाको ब्रह्मरूप सर्प डस्यो सो ब्रह्मरूप सर्पको विषहरनवारो जो रामनाम
ताको नहीं मानै है । गाडुरि जे हैं ते आर बोलै हैं झारै हैं । इहां सतगुरु जेहैं तें
रामनाम उपदेश करै हैं परंतु नहीं मानै हैं सो बिषयकी कियारी जो या संसार
तामें आत्मज्ञानरूप बीज बोयो सो वा बिरहुली कहे मायैआय सो अवलोरत कहे
काटतमें का पछिताय है । अबका विषम छांड़ै है ! नहीं छांड़ै है । कहूं ब्रह्मानं-
दकी कहूं विषयानन्दकी चाह । विद्यामें ब्रह्मानन्दकी चाह अविद्यामें विषयानन्दकी
चाह तोको नहीं छांडै है ॥ १० ॥ ११ ॥
जन्मजन्मअवतरेउबिरहुली।फलयक्कनयलडारबिरहुली १२
कहकबीरसचुपायबिरहुली।जोफलचाखहुमोरबिरहुली १३
सो हे जीव बिरहुली जो माया ताहीमें तुम जन्मजन्म अवतरचो । जौनै
बिरहुलीको फल धोखाब्रह्म । औ वह कर्मफल कैसो है कि, कनयल कैसो फल
है अर्थात् निरसहै रस नहीं है औबिषधरहै सो कौनीतरहते सचुपावोगे । सो
श्रीकबीरजी कहै हैं कि, तब सचुको पावै जब फल मोर चाखै कहे जौने राम-
नाममें मैं जप्यो हौं ताही फलको चाखै तो सुचित्तई पावै या कनयल का फल
न चाखै ॥ १२ ॥ १३ ॥
इति बिरहुली समाप्त ।