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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 559

बेलि । ( ५१५ )
ई तो है विधि भाग हो रमैयाराम ।
गुरु दीन्ह्यो मोहिं थापि हो रमैयाराम ॥ ३ ॥
गोबर कोट उठायहु हो रमैयाराम ।
परिहरि जैहो खेत हो रमैयाराम ॥ ४ ॥
साहब कहैं हैं कि रामनामके रमनवारे यहस्मृति विधि निषेधका भागकहावै
तौने भागबश मोको गुरुवा लोग बहँकाइ दियो मैं काकरों मेरोदोष कौन
है तौ हमारो महल छोड़ि तहीं गोबरको कोट उठायहुहै जो तैं गुरुवालोगनके
न जाते और उपासना न पूछते तौ वे काहेको बतौते सो मोको परिहरिकै
तैं संसाररूप खेत में जाय है जहां सब उत्पत्तिहोइहै ॥ ३ ॥ ४ ॥
बुधि बल तहां न पहुंचै हो रमैयाराम ।
खोज कहांते होय हो रमैयाराम ॥ ५ ॥
सुनि मन धीरज भयल हो रमैयाराम ।
मन बढ़िरहल लजाय हो रमैयाराम ॥ ६ ॥
सो धोखाब्रह्म में बुद्धि बल नहीं पहुँचे है शून्य है खोज कहां ते होई । जो
कहो कि आपै में तो बुद्धि बल नहीं पहुंचै है तौ जो कोई मेरे रामनाममें रमैहै
मोको जानै है ताकोमहीं बताइ देउँ हौं नयनइन्द्रिय देउँहौं ताहीमें मोहिंदेखै है
॥५॥ गुरुवनकी बाणी सुनिकै जो तेरे मनमें धैर्य भयो कि हम ब्रह्म है जाइँगे
सो हे राम में रमन वारे वा ब्रह्ममें मन बढ़िकै कहे बिचार करत करत लजाय
गयो ब्रह्म न भयो मन अपनी गति जब नहीं देखै है तब सकुचिकै वाही में
रहिजाइहै मनको नाश नहीं होयहै ॥ ६ ॥
फिरि पाछे जनि हेरौ हो रमैयाराम ।
काल बूत सब आय हो रमैयाराम ॥ ७ ॥
कह कबीर सुनौ संतौ हो रमैयाराम ।
मति ढिगही फैलाव हो रमैयाराम ॥ ८ ॥