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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 558

( ५१४ ) बीजक कबीरदास ।
बुधि बल तहां न पहुंचै हो रमैयाराम ।
खोज कहांते होय हो रमैयाराम ॥ ५ ॥
सुनि मन धीरज भयल हो रमैयाराम ।
मन वढ़ि रहल लजाय हो रमैयाराम ॥ ६ ॥
फिरि पाछे जनि हेरहु हो रमैयाराम ।
काल बूत सब आय हो रमैयाराम ॥ ७ ॥
कह कवीर सुनौ संतो हो रमैयाराम ।
मति ढिगही फैलाव हो रमैयाराम ॥ ८ ॥
भल सुस्मृतिजहडायहु हो रमैयाराम ।
धोखा कियो विश्वास हो रमैयाराम ॥ १ ॥
साहब कहैं हैं हे रामनामके रमनवारे जीव तुम भली तरहते स्मृतिमें जह-
ड़ाय गयो । स्मृतिको तात्पर्यार्थ जो मैं ताको न जान्यो काहेतेकि धोखा
ब्रह्ममें विश्वास कीन्ह्यो ॥ १ ॥
सो तौ है बनसी कसि हो रमैयाराम ।
शिर कै लियो विश्वास हो रमैयाराम ॥ २ ॥
सोतौ है कहे सो धोखाब्रह्म बंशीकी नाईं है जो मछरीबंशीमें लागै है ताको
प्राण छूटिजाइहै, ऐसे तूहूं वामें लगैहै सो तेरो जीवत्व न रहैगो । अर्थात् तेरो
स्वरूप भूलि जाइगो मुरदाकी नाईंटँग्यो रहैगो। तौनेधोखा ब्रह्ममें शिरकै बिश्वास
कै लिये है । अथवा जे गुरुवालोग तोको धोखा ब्रह्ममें बिश्वास कराइ देइहैं
स्मृतिन का अर्थ फेरिकै ते बनके सीगट हैं । उहां हैं वा जो ब्रह्महै सो तैं आहे
यही कहै हैं अथवा हुआहै हुआ है या कहैं हैं कि तैं लगा सो ब्रह्महुआ जैसे
सीगटनकी बाणीमें अर्थ नहींहै ऐसे गुरुवा लोगनकी बाणी में अर्थनहीं है तैं
ब्रह्म कबहूं न होइगो तैं रामनाममें रमनवारो है सो ताहीमें रमै तबहीं
तेरोबनैगो ॥ २ ॥