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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 557

आगि लगी सरवरमें हो रमैयाराम ।
सरवर जरिभो क्षार हो रमैयाराम ॥ १४ ॥
कहै कबीर सुनो संत हो रमैयाराम ।
पंरख लेहु खर खोट हो रमैयाराम ॥ १५ ॥
जब हंसा उड़ि चलैहै तब सरवर जो शरीर तामें आगि लगै है सरवर
जरिकै क्षारहै जाइ है सो हे रामनाम के रमनवारे तुम तो संसारमुख अर्थकैकै
संसारमें परचो सो तुम्हारी यहदशा होतभई ॥ १४ ॥ श्रीकबीरजी कहै हैं
कि, हे सन्तो! साहब जो कहै हैं ताको सुनते जाउ । तुमतो रामनाममें रमन-
वारेहो सो रामनामको जगतमुख अर्थ छांडिकै साहब मुख अर्थ करिकै साहब
में लागो साहब की बाणी गहो खरखोट परखिलेहु कौन खराहै कौन खोटाहै
साहबमुख अर्थ खराहै काहेते साहिबै अपने मुख कहै हैं जगतमुख अर्थ खोटाहै
सो खोट छांड़िकै साहबमें लागो ॥ १५ ॥
इति प्रथम बेलि समाप्त ।
अथ द्वितीयबेलि ।
भल सुस्मृति जहडायहु हो रमैयाराम ।
धोखा कियो बिश्वास हो रमैयाराम ॥ १ ॥
सोतो हैं बन सीकसि हो रमैयाराम ।
शिरकै लियो विश्‍वास हो रमैयाराम ॥ २ ॥
ईतौ हैं बिधि भाग हो रमैयाराम ।
गुरु दीन्हों मोहिं थापि हो रमैयाराम ॥ ३ ॥
गोबर कोट उठायहु हो रमैयाराम ।
परिहरि जैहो खेत हो रमैयाराम ॥ ४ ॥
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