कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलि । ( ५११ )
अर्थात् अनेक योनिनमें भटकत फिरौगे तब मेरो ज्ञान होयगों ? तैं जागतै में
लूटिगयो है तैं का जागत रहे है नहीं जागत रहे ॥ ३ ॥ हे राममें रमनवारे !
आपनो देश साकेत ताको छोड़िकै विराने कहैं मनकेदेशमें परचोहै तैसो
अनेक योनिनमें तेरी आंखी आंशू ढारिढारि फूटिजायँगी ॥ ४ ॥
त्रास मथन दधि मथन हो रमैया राम ।
भवन मथ्यो भरि पूरि हो रमैया राम ॥ ५ ॥
हंसा पाहन भयल हो रमैयाराम ।
बेधि न पद निर्वाण हो रमैयाराम ॥ ६ ॥
तुम हंसा मन मानिक हो रमैयाराम ।
हटल न मानेहु मोर हो रमैयाराम ॥ ७ ॥
त्रास मथन जो है रामनाम तौनै है दधिमथन कहै मथानी तौनेते हे राम-
नामके रमनवारें ! भव समुद्र जो तेरे हृदयमें भरपूरि है ताको काहे नहीं मथ्यो ?
॥ ५ ॥ हेरामनामके रमनवारे ! तैंतो चैतन्य है मँनके साथ तुहूं जड़ह्वैगये है
काहेते कि निर्वाणपदको न बेधि कै तैं जड़ ह्वैगये है जो निर्वाणपद को बेधते
तो मेरे साकेत को जाते ॥ ६ ॥ हे हंसा तुम्हीं मन में मानिकै कहो तो जब
तुम राम नामको जगतमुख अर्थ करन लग्यो है तब मैं हटक्यों है सो तुम
नहीं मान्यो है सो तुमतो रामनाम के रमैयाहो परंतु राम नाम जो मोको वर्ण-
नकरै ताको अर्थ नहीं जान्यो संसारमें परचो है ॥ ७ ॥
जसरे कियो तस पायो हो रमैयाराम ।
हमर दोष जनि देहु हो रमैयाराम ॥ ८ ॥
अगम काटि गम कीन्हों हो रमैयाराम ।
सहज कियो वैपार हो रमैयाराम ॥ ९ ॥
राम नाम धन बनिजहु हो रमैयाराम ।
लादेहु वस्तु अमोल हो रमैयाराम ॥ १० ॥