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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 554

( ५१० ) बीजक कबीरदास ।
राम नाम धन बनिजहु हो रमैया राम ।
लादेहु वस्तु अमोल हो रमैया राम ॥ १० ॥
नौ बहिया दश गौन हो रमैया राम ।
पांच लदनवा लादे साथ हो रमैया राम ॥ ११ ॥
पांच लदनवा परे हो रमैया राम ।
खाखरि डारिनि खोरि हो रमैया राम ॥ १२ ॥
शिर धुनि हंसा चले हो रमैया राम ।
सरवर मीत जोहार हो रमैया राम ॥ १३ ॥
आगी सरवर लागि हो रमैया राम ।
सरवर भो जरिक्षार हो रमैया राम ॥ १४ ॥
कहै कबीर सुनो सन्तो हो रमैया राम ।
परखिलेहु खर खोट हो रमैया राम ॥ १५ ॥
हंसासरवरसरिरहोरमैयाराम।जागतचोरघरमूसलहोरमैयाराम १
जोजागलसोभागलहोरमैयाराम । सोवतगैलबियोगहोरमैयाराम २
सो हे राम नामकेँ रमनवारे हंसा ! या शरीर रूप सरवरमें तेरो ज्ञान जाग-
तमें चोरमूसि लियो ॥ १ ॥ जो जागतहै मोहनिशाते सो भागै है संसारते सो
हे राममें रमनवारे मोहनिशामें सोवत सब बिगोय गये हैं कहे नानायोनिमें
संसारस्वप्रमें भटकत फिरै हैं ॥ २ ॥
आजबसेरानियरेहो रमैयाराम।कालिहबसेरा दूरि होरमैयाराम३
परेहु बिराने देश हो रमैयाराम।नैन मेरेंगे ढूंढ़िहो रमैयाराम४
सो हे राममें रमनवारे! आजु बसेरा नेरे है कहे मानुष शरीरई में ज्ञान होइ
है सो पायेहै काल्हि कहे जब या शरीर छूटि जायगो तब बसेरा दूरि ह्वैजायगों