कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५०६ ) बीजक कबीरदास ।
मरकट मूठी स्वादकी मन बौराहो ।
लीन्हों भुजा पसारि समझ मन बौराहो ॥ ७ ॥
छूटनकी संशय परी मन बौराहो ।
घर घर खायो डांग मन बौराहो ॥ ८ ॥
ज्यों सुवना नलिनी गह्यो मन बौराहो ।
ऐसा मर्म विचारि समझ मन बौराहो ॥ ९ ॥
पढ़े गुने का कीजिये मन बौराहो ।
अंत बिलैया खाय समझ मन बौराहौ ॥ १० ॥
सूने घरका पाहुना मन बौराहो ।
ज्यों आवै त्यों जाय ममुझ मन बौराहो ॥ ११ ॥
न्हाने को तीरथघनी मन बौराहो ।
पूजैका बहुदेव समझ मन बौराहो ॥ १२ ॥
बिनपानी नर बूड़िया मन बौराहो ।
तुम टेकहु राम जहाज समझ मन बौराहो ॥ १३ ॥
कह कबीर जग भर्मिया मन बौराहो ।
तुम छोड़े हरिका सेव समझ मन बौराहो ॥ १४ ॥
जारहु जगको नेहरा मन बौराहो ।
जामें शोक संताप समझ मन बौराहो ॥ १ ॥
कालबूतकी हस्तिनी मन बौराहो ।
चित्र रचो जगदीश समझ मन बौराहो ॥ २ ॥